हुक्मरानी का मॉडल
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हज़रत उमर (रज़ि.) इस्लामी तारीख़ की अज़ीम शख़्सियत थे। उनको यह हरगिज़ गवारा न होता था कि खाने-पीने और रहन-सहन के मामले में आम लोगों पर किसी क़िस्म की बरतरी इख़्तियार करें।
एक बार जब उनके दौरे-ख़िलाफ़त में सूखा पड़ा तो उन्होंने क़सम खा ली कि जब तक लोगों पर ख़ुशहाली के दिन नहीं आ जाते वे घी इस्तेमाल नहीं करेंगे। पूरा साल इसी हाल में गुज़रा, यहाँ तक कि आपके अंदर कमज़ोरी के आसार नुमायाँ होने लगे और आपके चेहरे की ताज़गी जाती रही। लोगों ने इस हालत पर तरस खाकर सुझाव दिया कि आप अपने ज़रूरी ख़र्च के लिए कुछ रक़म बैतुलमाल (राजकोष) से ले लिया करें। मगर आपने इस सुझाव को नामंज़ूर कर दिया। आप फ़रमाया करते कि :
“जनता के हाल की मैं उस वक़्त तक क्या परवाह कर सकता हूँ जब तक मैं ख़ुद उस हालत से न गुज़रूँ जिस हालत में तमाम लोग गुज़र कर रहे हैं।”
हुक्मराँ के इस मॉडल को देखिए और आज के अपने इन हुक्मरानों की हालत को देखिए। यक़ीनन आपको ज़मीन आसमान से कई गुना ज़्यादा फ़र्क़ नज़र आएगा।
हुक्मरानी के इस मॉडल को क्या आप रिपीट नहीं करना चाहेंगे?