Category: Religious Terminology
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इस्लाम की राह में रुकावट
इस्लाम के लिए रुकावट की एक वजह हमारी कट्टर और बेरूह धार्मिकता है, जिसे आजकल इस्लाम समझा जा रहा है। इस बेरूह दीन का पहला
मुसलमानों में इत्तिहाद
मुसलमानों में इत्तिहाद की जितनी कोशिशें की गई हैं इन्तिशार उतना ही बढ़ा है और इस तरह की कोशिशें मुस्तक़बिल में इस इन्तिशार को और
इस्लाम दीन है या मज़हब?
दीन कहते हैं एक ऐसे निज़ामे-ज़िन्दगी को जिसमें ज़मामे-इक़्तिदार के तहत नज़्म-व-नस्क़ हो, जज़ा और सज़ा हो, फ़ैसले और उनका निफ़ाज़ हो। दीन कहते हैं
बग़ैर हवाले के कोई बात कहना और सुनना
साथियो! मुसलमान होने के नाते जिस दीन को हम फ़ॉलौ करते हैं वो बहुत ही सटीक और सीधा दीन है। इसमें किसी तरह की कोई
बे-सुरूर नमाज़ें
एक साहब जुमे के ख़ुत्बे में फ़रमा रहे थे, बल्कि दावा कर रहे थे कि “मुसलमानों की जितनी तादाद जुमे में आती है अगर उतनी
तक़वा और शुह्हे-नफ़्स
तक़वा क़ुरआन मजीद के Key Words में से है बल्कि ये क़ुरआन मजीद की उन अहम इस्तिलाहात (Terminologies) में से है जिनकी तरफ़ अल्लाह ने
इस्लामी क़ानून की ख़ुसूसियत
इस्लामी क़ानून अपनी तबीअत और मिज़ाज (स्वभाव) में ज़मीन पर बनने वाले सभी क़ानूनों से बिलकुल मुख़्तलिफ़ (भिन्न) है। इस्लामी क़ानून किसी एक तबक़े (वर्ग)
सब्र का मतलब
लोगों को भलाई की तरफ़ बुलाने और बुराई से रोकने का काम उस वक़्त तक जारी रहना चाहिए जब तक कि सुननेवाले कान और सोचने-समझनेवाले