
Khaire Ummat
मुसलमानों की सबसे बड़ी ख़ूबी उनका एक बा-मक़सद ‘उम्मत’ और ‘ख़ैरे-उम्मत’ होना है, न कि दूसरी क़ौमों की तरह महज़ एक क़ौम होना। जब तक

मुसलमानों की सबसे बड़ी ख़ूबी उनका एक बा-मक़सद ‘उम्मत’ और ‘ख़ैरे-उम्मत’ होना है, न कि दूसरी क़ौमों की तरह महज़ एक क़ौम होना। जब तक
ज़वाल की शिकार क़ौमें — — — हक़ीक़त ये है कि किसी नज़रिये और फ़िक्र पर वुजूद में आनेवाली क़ौमें अपने शुरूआती ज़माने में हिम्मत,
मुसलमान क्या हैं और क्या होना चाहिये — — — हक़ीक़त ये है कि मौजूदा हालात मुसलमानों की कुछ इस तरह की तस्वीर पेश कर
नौजवानों और उलमा के बीच हम-आहंगी — — — मुसलमानों की बदतर सूरते-हाल के लिये जो बातें ज़िम्मेदार हैं उनमें से एक ये भी है
प्यारे नबी के प्यारे साथी — — — प्यारे नबी (सल्ल) ने अपने साथियों को निरा सूफ़ी और दरवेश नहीं बनाया, इन्हें राहिबों और जोगियों
हुक्मरानी का मॉडल — — — हज़रत उमर (रज़ि.) इस्लामी तारीख़ की अज़ीम शख़्सियत थे। उनको यह हरगिज़ गवारा न होता था कि खाने-पीने और
इक़बाल : सफ़ें कज, दिल परीशाँ सजदा बे-ज़ौक़ — — — सफ़ें कज, दिल परीशाँ सजदा बे-ज़ौक़।के जज़्बे-अन्दरूँ बाक़ी नहीं है।। दूसरे मिसरे के बारे
मोहब्बत की हक़ीक़त असल में मोहब्बत आज़ादी का नहीं बल्कि बंधन (ग़ुलामी) का नाम है। लेकिन इस बंधन में ऐसा आनंद होता है जो इंसान
लेबल दीन का और बीज मज़हब का — — — ख़िलाफ़ते-राशिदा के ख़ात्मे के बाद एक बहुत बड़ा हादिसा सिर्फ़ यही नहीं हुआ कि मुसलमानों
अफ़राद के हाथों में है अक़वाम की तक़दीर।हर फ़र्द है मिल्लत के मुक़द्दर का सितारा।। मेरे नौजवान साथियो! शायद तुम्हें मालूम नहीं है कि तुम्हारी