अफ़राद के हाथों में है अक़वाम की तक़दीर।
हर फ़र्द है मिल्लत के मुक़द्दर का सितारा।।
शायद तुम्हें मालूम नहीं है कि तुम्हारी क़ौम किस क़दर पस्ती का शिकार हो रही है। इस क़ौम को अगर कोई पस्ती से निकाल सकता है तो वो नौजवान है। मगर क्या वो नौजवान इस क़ौम के मुक़द्दर का सितारा बन पाएँगे जो अपना क़ीमती वक़्त रातों को सोशल-मीडिया पर और लड़कियों से बातें करने में गुज़ार देते हों?इसलिये अपनी ज़िन्दगी की हक़ीक़त को पहचानो, अपने-आपको ग़फ़लत से निकालो और अपनी ज़िन्दगी के क़ीमती लम्हात को तामीरी (Constructive) कामों में लगाओ। ज़िन्दगी के ये क़ीमती लम्हात फिर कभी तुम्हें नसीब नहीं होंगे।क़ुरआन को अपनी रातों का साथी बनाओ; दिन में ऐसे नेक लोगों की सोहबत इख़्तियार करो जो तुम्हें ज़िन्दगी की मुश्किल पगडंडियों पर ख़ूबसूरती के साथ चलने का हुनर सिखा सकें।मुहब्बत मुझे उन जवानों से है।सितारों पे जो डालते हैं कमंद।।