बाज़ीचा-ए-अतफ़ाल है दुनिया मिरे आगे
होता है शब-ओ-रोज़ तमाशा मिरे आगे
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मतलब
शाइर कहता है कि मेरी निगाह में इस दुनिया की हैसियत ऐसी है जैसे बच्चों के लिये खेल का मैदान। यहाँ जो रात-दिन हादिसे और घटनाएँ होती रहती हैं वो मेरी नज़र में खेल तमाशे से ज़्यादा कुछ हैसियत नहीं रखतीं। इस हक़ीक़त से इनकार नहीं है कि बच्चे के लिये खेल के मैदान की बड़ी अहमियत होती है लेकिन उसी बच्चे के अन्दर जब समझदारी आ जाती है तो वो उस मैदान की हक़ीक़त को समझ जाता है कि इस मैदान से हमेशा नहीं जुड़े रहना है बल्कि ये खेल का मैदान तो महज़ कुछ देर की तफ़रीह का सामान है इससे ज़्यादा इसकी कोई हैसियत नहीं है। इसी तरह समझदार लोग इस हक़ीक़त को भी अच्छी तरह समझ लेते हैं कि इस दुनिया में जो भी फ़ायदा या नुक़सान हो रहा है सब वक़्ती और आरज़ी है।
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