चे मुल्लाई, चे दरवेशी, चे सुल्तानी, चे दरबानी।
फ़रोग़े-कार मी जोयद ब-सालूसी व ज़र्राक़ी।।
अल्लामा इक़बाल (रह०)
मतलब
मुल्ला (आलिमे-दीन) हो चाहे दरवेश, सुल्तान (बादशाह) हो या दरबारी (ब्यूरोक्रेट्स)! सब (अक्सर व बेशतर) ने अपनी-अपनी दुकानें खोल रखी हैं और अपने-अपने कारोबार को बढ़ाने में लगे हुए हैं। और (अपनी-अपनी दुकानें खोले रखने में भी शायद इतना बड़ा नुक़सान नहीं था, इससे भी बढ़कर सितम ये है कि) अपने-अपने कारोबार को बढ़ाने में ये सब फ़रेबकारी और मुनाफ़िक़त से काम ले रहे हैं।
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