हमवार ज़मीन और सही सालिम बीज
अगर ज़मीन को हमवार करके खेत में सही-सालिम बीज न डाला जाए तो दो नतीजे बरामद होते हैं : 1) अगर ज़मीन बिलकुल बंजर है
अगर ज़मीन को हमवार करके खेत में सही-सालिम बीज न डाला जाए तो दो नतीजे बरामद होते हैं : 1) अगर ज़मीन बिलकुल बंजर है
इस बात में कोई शक नहीं है कि उलमाए-किराम ज़मीन के चराग़ ओर अंबिया के क़ायम मक़ाम हैं। [العلماء مصابیح الارض وخلفاء الانبیاء] हम सब
मुसलमानों की बदतर सूरते-हाल के लिये जो बातें ज़िम्मेदार हैं उनमें से एक ये भी है कि मुस्लिम नौजवानों और उलमा व दानिशवरों के दरम्यान
सलाहियत और सालेहियत ये दो ऐसी ख़ूबियाँ हैं जो इन्सानी शख़्सियत को परवान चढ़ाने में बड़ा ही अहम रोल अदा करती हैं। दुनिया में जितनी
“मैं हूँ” मैं हूँ का यक़ीन इन्सान के अन्दर अपने होने का वो पॉज़िटिव सेन्स डेवेलप करता है, जिससे इन्सान न सिर्फ़ अपने-आपको बना, सँवार
जुमे के ख़ुत्बे में मौलाना तक़रीर फ़रमा रहे थे कि “मदारिस इस्लाम के क़िले हैं” ये सुनकर एक साहब ने कहा कि “मदारिस मज़बूत क़िले
एक साहब जुमे के ख़ुत्बे में फ़रमा रहे थे, बल्कि दावा कर रहे थे कि “मुसलमानों की जितनी तादाद जुमे में आती है अगर उतनी
लीडर वो होता है जिसमें सही रहनुमाई करने की अहलियत और सलाहियत होती है। हम इस बात को इस तरह भी कह सकते हैं कि
अगर हम ये मानते हैं कि समाज से अख़लाक़ का दिवालिया निकल गया है, अगर हम ये मानते हैं कि मुल्क ज़ुल्म, जब्र व इस्तिब्दाद
मेरा फ़ेवरेट स्कॉलर वही है जो… * क़ुरआन पर अमल करता हो और लोगों में क़ुरआन की समझ पैदा करने में मदद करता हो, लेकिन