Aao ladna seekhein
आओ लड़ना सीखें लड़ना इन्सान की फ़ितरत में शामिल है। अपनी बक़ा (Survival) के लिये उसे हर वक़्त लड़ना ही पड़ता है। हमारा ज़िन्दा जिस्म
आओ लड़ना सीखें लड़ना इन्सान की फ़ितरत में शामिल है। अपनी बक़ा (Survival) के लिये उसे हर वक़्त लड़ना ही पड़ता है। हमारा ज़िन्दा जिस्म
उम्मत का बुख़ार पिछले क़रीब 4 दिन लगातार बुख़ार की हालत से गुज़रा। बुख़ार की शुरुआत बहुत तेज़ सर्दी के साथ होती। बॉडी के अन्दर
दोस्तो! इन्सान की फ़ितरत है कि जब उस पर कोई आफ़त आती है तो वो मायूस हो जाता है और दिल हारकर बैठ जाता है।(क़ुरआन
महब्बत का उसूल है कि जिस किसी से जितनी ज़्यादा मुहब्बत होगी उससे उतना ही ज़्यादा ख़ौफ़ और डर भी होगा, इसीलिए अल्लाह ने ईमान
तीन क़ुव्वतें ऐसी हैं जो मुस्लिम-दुनिया पर हावी हैं और जिनका ख़ात्मा इस्लाम और मुसलमानों की तरक़्क़ी के लिये ज़रूरी है। अव्वल ‘पापाइयत’ या दूसरी
अफ़राद के हाथों में है अक़वाम की तक़दीर। हर फ़र्द है मिल्लत के मुक़द्दर का सितारा।। मेरे नौजवान साथियो! शायद तुम्हें मालूम नहीं है कि
क्या ये कोई सोची-समझी साज़िश है कि मुसलमानों को दिफ़ा (डिफ़ेंस) के कामों में ही लगाए रखो। कोई न कोई इशू ताज़ा रखो ताकि इस
अगर मुसलमानों ने अपने अख़लाक़ को दुरुस्त नहीं किया और मुआशरे में अपने करने के कामों पर फ़ोकस नहीं किया तो ये दुआएँ कुछ काम
अगर आप दर्द की शदीद तकलीफ़ में मुब्तला हैं तो ऐसे में तीन किरदारों में से आप किसे पसन्द करेंगे: एक वो शख़्स है जो