Safein Kaj, Dil Pareshan, Sajdey be-zoq
इक़बाल : सफ़ें कज, दिल परीशाँ सजदा बे-ज़ौक़ — — — सफ़ें कज, दिल परीशाँ सजदा बे-ज़ौक़।के जज़्बे-अन्दरूँ बाक़ी नहीं है।। दूसरे मिसरे के बारे
इक़बाल : सफ़ें कज, दिल परीशाँ सजदा बे-ज़ौक़ — — — सफ़ें कज, दिल परीशाँ सजदा बे-ज़ौक़।के जज़्बे-अन्दरूँ बाक़ी नहीं है।। दूसरे मिसरे के बारे
अफ़राद के हाथों में है अक़वाम की तक़दीर।हर फ़र्द है मिल्लत के मुक़द्दर का सितारा।। मेरे नौजवान साथियो! शायद तुम्हें मालूम नहीं है कि तुम्हारी
साहिबे – क़ुरआँ व बे-ज़ौक़े – तलब ! अल-अजब, सुम्मल-अजब, सुम्मल-अजब ! तशरीह : कितने हैरत की बात है कि कोई शख़्स या कोई क़ौम
चे मुल्लाई, चे दरवेशी, चे सुल्तानी, चे दरबानी। फ़रोग़े-कार मी जोयद ब-सालूसी व ज़र्राक़ी।। अल्लामा इक़बाल (रह०) —— मतलब मुल्ला (आलिमे-दीन) हो चाहे दरवेश, सुल्तान
अफ़राद के हाथों में है अक़वाम की तक़दीर। हर फ़र्द है मिल्लत के मुक़द्दर का सितारा।। मेरे नौजवान साथियो! शायद तुम्हें मालूम नहीं है कि
ब-जलाले-तू कि दर दिले-दिगर आरज़ू नदारम। ब-जुज़ ईं दुआ कि बख़्शी ब-कबूतराँ उक़ाबे।। तर्जमा : (ऐ मेरे रब) तेरे जलाल की क़सम मेरे दिल में