Category: Social

समाज में बदलाव

सोच बदलेंगे तो अक़ीदा बदलेगा। अक़ीदा बदलेगा तो मिज़ाज बदलेगा। मिज़ाज बदलेगा तो किरदार बदलेगा। किरदार बदलेगा तो समाज में वो इन्क़िलाब बरपा होगा जिसकी

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उलमाए-हक़ और उलमाए-सू

उलमा दो क़िस्म के होते हैं, उलमाए-हक़ और उलमाए-सू। जिस शख़्स का ख़ुद का ताल्लुक़ क़ुरआन से मज़बूत हो और उसपर अमल करता हो और

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मेरा फ़ेवरेट स्कॉलर

मेरा फ़ेवरेट स्कॉलर वही है जो… * क़ुरआन पर अमल करता हो और लोगों में क़ुरआन की समझ पैदा करने में मदद करता हो, लेकिन

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मज़हब एक अफ़ीम है

मज़हब एक ऐसी अफ़ीम है जो डायरेक्ट दिमाग़ पर असर करती है और दिलों में दूसरों के लिये नफ़रत पैदा कर देती है, जिससे पूरा

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तलाक़ का सही तरीक़ा

क़ुरआन से दूरी का ही नतीजा है कि आज हिन्दुस्तानी मुसलमानों की बड़ी अक्सरियत ये समझती है कि मर्द के पास औरत को तलाक़ देने

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Talaaq ka Quraani Tareeqa

तलाक़ का क़ुरआनी तरीक़ा इस्लाम अपनी फ़ितरत और स्वभाव में रहमत का दीन है. इन्साफ़, मसावात (बराबरी) और मवासात (ग़मख़ारी) का दीन है. इस्लाम की

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Tripple Talaaq

अपनी ख़िदमत और दीगर कामों को कराने के लिए ग़ुलाम रखने को इस्लाम ने कभी हराम क़रार नहीं दिया. लेकिन ग़ुलामों के साथ अच्छा सुलूक

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Uniform Civil Code

⁠⁠⁠मुल्क की जो मौजूदा सूरते-हाल हमारे सामने है उसमें वाक़ई हमें एकजुट होकर हक़ और इंसाफ़ के लिए आवाज़ उठाने की ज़रूरत है। हमें यक़ीनन

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