समाज में पॉज़िटिव तब्दीली लाने के लिये दो चीज़ें
समाज में पॉज़िटिव तब्दीली लाने के लिये दो चीज़ें बहुत अहम हैं : एक ये कि जिस फ़र्द या गरोह को जिन उसूलों पर तब्दीली
समाज में पॉज़िटिव तब्दीली लाने के लिये दो चीज़ें बहुत अहम हैं : एक ये कि जिस फ़र्द या गरोह को जिन उसूलों पर तब्दीली
बहुत-से नादानों की राय है कि क़ौम व मिल्लत की इस्लाह व तरक़्क़ी तालीम और टेक्नालोजी के रास्ते से ही की जा सकती है। बहुत-से
पूरी कायनात में शान्ति और अम्न क़ायम है। कारण यह है कि हर चीज़ अपनी ड्यूटी को ज़िम्मेदारी के साथ अंजाम दे रही है और
मुसलमानों में इत्तिहाद की जितनी कोशिशें की गई हैं इन्तिशार उतना ही बढ़ा है और इस तरह की कोशिशें मुस्तक़बिल में इस इन्तिशार को और
तीन क़ुव्वतें ऐसी हैं जो मुस्लिम-दुनिया पर हावी हैं और जिनका ख़ात्मा इस्लाम और मुसलमानों की तरक़्क़ी के लिये ज़रूरी है। अव्वल ‘पापाइयत’ या दूसरी
अगर आप दर्द की शदीद तकलीफ़ में मुब्तला हैं तो ऐसे में तीन किरदारों में से आप किसे पसन्द करेंगे: एक वो शख़्स है जो
सलाहियत और सालेहियत ये दो ऐसी ख़ूबियाँ हैं जो इन्सानी शख़्सियत को परवान चढ़ाने में बड़ा ही अहम रोल अदा करती हैं। दुनिया में जितनी
किसी भी मुल्क या समाज को बुरे अंजाम से अगर कोई चीज़ बचा सकती है तो वो ये है कि कोई गरोह ऐसा निज़ामे-फ़िक्र-व-अमल लेकर
एक साहब जुमे के ख़ुत्बे में फ़रमा रहे थे, बल्कि दावा कर रहे थे कि “मुसलमानों की जितनी तादाद जुमे में आती है अगर उतनी
लीडर वो होता है जिसमें सही रहनुमाई करने की अहलियत और सलाहियत होती है। हम इस बात को इस तरह भी कह सकते हैं कि