Kirdar ki khushbu ko phailney sey roka nahi ja sakta
किरदार की ख़ुशबू को फैलने से रोका नहीं जा सकता — — — रसूलुल्लाह (सल्ल०) का उसवा (नमूनाए-ज़िन्दगी) हमें ये बताता है कि लोग शिर्क
किरदार की ख़ुशबू को फैलने से रोका नहीं जा सकता — — — रसूलुल्लाह (सल्ल०) का उसवा (नमूनाए-ज़िन्दगी) हमें ये बताता है कि लोग शिर्क
मुहम्मद (सल्ल०) की सीरत से मुताल्लिक़ कुछ ज़रूरी बातें— — — इस्लाम की नेमत हर ज़माने में इन्सान को दो ही ज़रिओं से पहुँची है।
प्यारे नबी के प्यारे साथी — — — प्यारे नबी (सल्ल) ने अपने साथियों को निरा सूफ़ी और दरवेश नहीं बनाया, इन्हें राहिबों और जोगियों
रसूलुल्लाह (सल्ल०) की दावते-हक़ — — — रसूलुल्लाह (सल्ल०) की दावते-हक़ ने इन्सानी दुनिया में वो अज़ीमुश्शान तब्दीली पैदा की जिसने दुनियाए-इन्सानियत की तारीख़ बदल
प्यारे नबी मुहम्मद (सल्ल०) की अज़मत का एक पहलू तो ये है कि आपने 23 साल की छोटी-सी मुद्दत में अरब के उजड्ड और बद्दू
रसूलुल्लाह (सल्ल०) की अज़मत को तस्लीम करते हुए उसके इज़हार का एक पहलू तो ये है कि हम उनके जन्म-दिन पर जुलूस निकालें, उनकी तारीफ़
तक़रीबन तमाम ही नबियों के साथ ये हादिसा पेश आया है कि उनके बारे में लोग दो तरह की गुमराही में मुब्तिला हुए हैं. पहली
रसूलुल्लाह की अज़मत कुछ इस वजह से नहीं है कि आप (सल्ल०) ने किसी बालाई ताक़त के बल पर कुछ ख़ास क़िस्म के मोजिज़े कर
हज़रत मुहम्मद (सल्ल०) की अज़मत के हवाले से बहुत-से लोगों को दूसरी बड़ी ग़लतफ़हमी ये हुई है कि आप (सल्ल०) को महज़ एक समाज-सुधारक मान
Prophet Muhammad (saw) is a historic figure of great importance who didn’t kill the criminals but cleansed their heart and within a very short period