इस्लाम की राह में रुकावट
इस्लाम के लिए रुकावट की एक वजह हमारी कट्टर और बेरूह धार्मिकता है, जिसे आजकल इस्लाम समझा जा रहा है। इस बेरूह दीन का पहला
इस्लाम के लिए रुकावट की एक वजह हमारी कट्टर और बेरूह धार्मिकता है, जिसे आजकल इस्लाम समझा जा रहा है। इस बेरूह दीन का पहला
मुसलमानों में इत्तिहाद की जितनी कोशिशें की गई हैं इन्तिशार उतना ही बढ़ा है और इस तरह की कोशिशें मुस्तक़बिल में इस इन्तिशार को और
दीन कहते हैं एक ऐसे निज़ामे-ज़िन्दगी को जिसमें ज़मामे-इक़्तिदार के तहत नज़्म-व-नस्क़ हो, जज़ा और सज़ा हो, फ़ैसले और उनका निफ़ाज़ हो। दीन कहते हैं
साथियो! मुसलमान होने के नाते जिस दीन को हम फ़ॉलौ करते हैं वो बहुत ही सटीक और सीधा दीन है। इसमें किसी तरह की कोई
एक साहब जुमे के ख़ुत्बे में फ़रमा रहे थे, बल्कि दावा कर रहे थे कि “मुसलमानों की जितनी तादाद जुमे में आती है अगर उतनी
इस्लामी क़ानून अपनी तबीअत और मिज़ाज (स्वभाव) में ज़मीन पर बनने वाले सभी क़ानूनों से बिलकुल मुख़्तलिफ़ (भिन्न) है। इस्लामी क़ानून किसी एक तबक़े (वर्ग)