Garohbandi Allah ka Azab hai
गरोह-बन्दी अल्लाह का अज़ाब है —— क़ुरआन मजीद की सूरा अनआम आयत-65 में अल्लाह फ़रमाता है قُلۡ ہُوَ الۡقَادِرُ عَلٰۤی اَنۡ یَّبۡعَثَ عَلَیۡکُمۡ عَذَابًا مِّنۡ
गरोह-बन्दी अल्लाह का अज़ाब है —— क़ुरआन मजीद की सूरा अनआम आयत-65 में अल्लाह फ़रमाता है قُلۡ ہُوَ الۡقَادِرُ عَلٰۤی اَنۡ یَّبۡعَثَ عَلَیۡکُمۡ عَذَابًا مِّنۡ
हदीस : हाफ़िज़े-क़ुरआन या आमिले-क़ुरआन — — — रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया : जिस शख़्स ने क़ुरआन पढ़ा और उसके मुताबिक़ अमल किया तो क़ियामत

मुझसे मिलना हो तो — — — मुझसे मिलना हो तो मैं अपने कलाम में उसी तरह मौजूद हूँ जिस तरह फूल में ख़ुशबू कहते
क्या क़ुरआन आज की प्लुरल सोसाइटी के लिये भी किताबे-हिदायत है? — — — कुछ लोग मानते हैं कि क़ुरआन नबी के मिशन की रुदाद
रसूलुल्लाह (सल्ल०) ने फ़रमायाा : बुरा है वो बन्दा जो तकब्बुर करे और इतराए और अल्लाह बुज़ुर्ग व बरतर को भूल जाए; और बुरा है
अगर मुसलमानों ने अपने अख़लाक़ को दुरुस्त नहीं किया और मुआशरे में अपने करने के कामों पर फ़ोकस नहीं किया तो ये दुआएँ कुछ काम
तक़वा क़ुरआन मजीद के Key Words में से है बल्कि ये क़ुरआन मजीद की उन अहम इस्तिलाहात (Terminologies) में से है जिनकी तरफ़ अल्लाह ने
क़ुरआन समझने की सारी तदबीरों के बावुजूद आदमी क़ुरआन की रूह से पूरी तरह वाक़िफ़ नहीं होने पाता, जब तक कि अमली तौर पर वो
किसी से हद दर्जे महब्बत का मतलब है उसके रंग में रंग जाना। ये महब्बत जिससे भी हो जाती है उसे दीवाना बना देती है।इश्क़