Label Deen ka aur Beej Mazhab ka
लेबल दीन का और बीज मज़हब का — — — ख़िलाफ़ते-राशिदा के ख़ात्मे के बाद एक बहुत बड़ा हादिसा सिर्फ़ यही नहीं हुआ कि मुसलमानों
लेबल दीन का और बीज मज़हब का — — — ख़िलाफ़ते-राशिदा के ख़ात्मे के बाद एक बहुत बड़ा हादिसा सिर्फ़ यही नहीं हुआ कि मुसलमानों
कब आएगी अल्लाह की मदद दुनिया में क़ौमों की हार-जीत का क़ायदा ये है कि जो गरोह सरकशी में एक हद से बढ़ता है तो
अंबियाई दावत को अंबियाई तरीक़े से पहुँचाने की ज़रूरत है। हम मुसलमान चूँकि अंबियाई मिशन रखनेवाली एक उम्मत हैं। इस ऐतिबार से हमारी दावत भी
पूरी इन्सानी तारीख़ में मुहम्मद (सल्ल०) की शख़्सियत एक ऐसी शख़्सियत है जिन्होंने दुनिया का सबसे अज़ीम कारनामा अंजाम दिया, इस लिहाज़ से आप (सल्ल०)
समाज में पॉज़िटिव तब्दीली लाने के लिये दो चीज़ें बहुत अहम हैं : एक ये कि जिस फ़र्द या गरोह को जिन उसूलों पर तब्दीली
كُلُّ أُمَّتِي يَدْخُلُونَ الْجَنَّةَ यानी “मेरी उम्मत का एक-एक फ़र्द जन्नत में जाएगा।” (हदीस) इस जुमले ने मुसलमानों में इतनी शोहरत पाई है कि यक़ीन
दीने-इस्लाम में ‘ईमान’ और ‘आमाले-सालेहा’ (नेक आमाल, अच्छे अख़लाक़) दो ऐसी ख़ूबियाँ हैं जिनसे ख़ुशहाली के दरवाज़े खुलते हैं और नेकियाँ फैलती हैं। अगर ये
इस्लाम की दावत का फ़ितरी तरीक़ा ये है कि हम ग़ैर-मुस्लिमों को मुसलमान बनाने की फ़िक्र न करें बल्कि ख़ुद मुसलमानों को मुसलमान बनाने की