शबे-बरात की हक़ीक़त
15 शाबान को जब रसूलुल्लाह (sl) रात को उठकर जन्तुल-बक़ी गए थे(*) तो क्या वहाँ से वापस आकर लोगों को किसी इबादत की ताकीद की
15 शाबान को जब रसूलुल्लाह (sl) रात को उठकर जन्तुल-बक़ी गए थे(*) तो क्या वहाँ से वापस आकर लोगों को किसी इबादत की ताकीद की
घर पर कुछ मेहमान आने वाले थे तो उनकी मेहमान-नवाज़ी में गोश्त की ज़रूरत महसूस हुई। मैं अपने एक क़स्साब दोस्त की दुकान पर गया
इस्लाम के नज़दीक हक़ीक़ी आज़ादी ये है कि इन्सान अपने ही जैसे दूसरे इन्सानों से और उनके बनाए हुए ग़लत उसूलों से, ग़लत रीति-रिवाजों से,
इन्सान आज भी है ग़ुलामी के सर-निगूँ ये और बात है कि हल्क़े बदल गए।। इन्सानों से कटकर स्पेस में रहने का नाम आज़ादी नहीं

आज़ादी और ग़ुलामी आज़ादी इन्सान की फ़ितरी ख़ाहिश और दिल की आवाज़ है। हर इन्सान आज़ाद रहना चाहता है, आज़ादी से सोचना चाहता है, आज़ादी
*प्रेम क्या है?* प्रेम प्रेम सब कहें, प्रेम न चिन्है कोई। आठ पहर भीना रहे, प्रेम कहाबै सोई।।* किसी के प्रति मात्र सामयिक रूप से
भारतीय धर्म ग्रन्थों में गुरु की बड़ी महिमा बयान की गई है। हमें बताया जाता है कि गुरु ही भगवान है, बल्कि गुरु का मर्तबा
इक अजनबी के हाथ में दे कर हमारा हाथ। लो साथ छोड़ने लगा आख़िर ये साल भी।। दोस्तो! ज़िन्दगी के पेड़ से एक और पत्ता