हज़रत लुक़मान की बेटे को नसीहत
बेटे! इल्म इसलिये हासिल न करो कि उसके ज़रिए आलिमों पर फ़ख़्र करो और जाहिलों और बेवक़ूफ़ों से झगड़ते फिरो और महफ़िलों में अपने आप
बेटे! इल्म इसलिये हासिल न करो कि उसके ज़रिए आलिमों पर फ़ख़्र करो और जाहिलों और बेवक़ूफ़ों से झगड़ते फिरो और महफ़िलों में अपने आप
ये बात एक मुसल्लेमा हक़ीक़त की हैसियत रखती है कि हमारे मसायल का हल तालीम में नहीं बल्कि निज़ामे-तालीम की दुरुस्ती में है। और निज़ामे-तालीम