बहुत-से नादानों की राय है कि क़ौम व मिल्लत की इस्लाह व तरक़्क़ी तालीम और टेक्नालोजी के रास्ते से ही की जा सकती है। बहुत-से दूसरे लोग हैं जो कहते हैं कि अगर क़ौम की माली हालत दुरुस्त कर दी जाए तो उम्मत के तमाम मसायेल का ख़ात्मा हो जाएगा।...
जिस्म की ज़कात
जिस तरह ज़मीन को कामयाब और बेहतरीन बनाने के लिए उसे झाड़-झंकाड़ से पाक किया जाता है, ये ज़मीन का तज़किया है। जिस तरह एक बेहतरीन फ़सल उगाने के लिए उसे खरपतवार (ग़ैर-ज़रूरी घास) से पाक किया जाता है, ये फ़सल का तज़किया है। जिस तरह पेड़...
महारत (Perfection) किस लिये?
किसी भी शख़्स को कोई काम इसलिए सिखाया जाता है कि वह उसे महारत (Perfection) के साथ कर सके। बच्चे को साइकल चलानी इसलिए सिखाई जाती है कि वो उसे महारत (Perfection) के साथ चला सके। किसी शख़्स को गाड़ी चलाना इसलिए सिखाया जाता है कि वो Perfection...
पारस पत्थर
रमज़ान के मुबारक महीने में हासिल करने के लिए दो चीज़ें हैं। एक तो ये कि हम तिलावते-क़ुरआन और नवाफ़िल के ज़रिए सवाब हासिल करें। (हम जानते हैं कि इस माह में एक नफ़ल एक फ़र्ज़ के बराबर और फ़र्ज़ 70 गुना हो जाता है।) इस तिलावते-क़ुरआन और नवाफ़िल के...
नाउम्मीदी कुफ़्र है
दोस्तो! इन्सान की फ़ितरत है कि जब उस पर कोई आफ़त आती है तो वो मायूस हो जाता है और दिल हारकर बैठ जाता है।(क़ुरआन 41:49) हिन्दुस्तान में मुसलमानों के इस वक़्त के हालात पर नज़र डालें तो मालूम होगा कि मुसलमान इस वक़्त मायूसी का शिकार हैं, ऐसा महसूस...
सर के ऊपर ऐनक
बिलाल साहब की बीनाई बहुत कमज़ोर थी। चीज़ों को सही शक्ल में देखने और किताबें वग़ैरा पढ़ने के लिये उनके पास एक ऐनक थी। एक दिन उन्हें बहुत ही क़ीमती किताब हाथ लगी। अब वो उसे पढ़ना चाहते थे, उसे पढ़ने के लिये उन्हें उस ऐनक की ज़रूरत थी। काफ़ी...
दावत
दावत का लुग़वी माना : दावत ‘द-अ-व’ से बना है जिसके माने हैं किसी को अपनी आवाज़ या बात से अपनी तरफ़ मायल और मुतवज्जेह कर लेना। सूरा बक़रा आयत-23 में कहा गया कि तुम अपने मददगारों को पुकारो। وَ ادۡعُوۡا شُہَدَآءَکُمۡ مِّنۡ دُوۡنِ اللّٰہِ اِنۡ کُنۡتُمۡ صٰدِقِیۡنَ “एक अल्लाह...
कबीर : प्रेम प्रेम सब कहै, प्रेम ना चिन्है कोई
प्रेम प्रेम सब कहै, प्रेम ना चिन्है कोई। आठ पहर भीना रहै, प्रेम कहाबै सोई।।* किसी के प्रति मात्र सामयिक रूप से आकर्षित हो जाने को प्रेम नहीं कहते, बल्कि प्रेम कहते हैं किसी के प्रति अपने आपको शाशवत रूप से समर्पित कर देने को। और ऐसा शाशवत प्रेम किसी...
ग़ालिब : रगों में दौड़ते फिरने के हम नहीं क़ायल।
रगों में दौड़ते फिरने के हम नहीं क़ायल। जब आँख ही से न टपका तो फिर लहू क्या है? -------------------------- मतलब इन्सान के जिस्म की रगों में ख़ून की गर्दिश को लेकर तीन कैफ़ियतें हो सकती हैं। ख़ून का रगों में सर्द हो जाना, ख़ून का रगों में दौड़ते रहना,...
ग़ालिब : बुलबुल के कारोबार पे हैं ख़ंदा-हा-ए-गुल
बुलबुल के कारोबार पे हैं ख़ंदा-हा-ए-गुल कहते हैं जिस को इश्क़ ख़लल है दिमाग़ का ------- मुश्किल अलफ़ाज़ ख़ंदा-हा-ए-गुल = तमाम फूलों की हँसी ख़लल = बिगाड़, पागलपन, फ़तूर ------- मतलब बुलबुल गुल का आशिक़ होता है। इस आशिक़ी में वो दीवाना होता है। लेकिन गुल इस इश्क़ के अंजाम...