क्या सारी उम्मत जन्नत में जाएगी

كُلُّ أُمَّتِي يَدْخُلُونَ الْجَنَّةَ यानी "मेरी उम्मत का एक-एक फ़र्द जन्नत में जाएगा।" (हदीस) इस जुमले ने मुसलमानों में इतनी शोहरत पाई है कि यक़ीन के दर्जे को हासिल कर लिया है और मुसलमानों को अमल से फ़ारिग़ कर दिया है, बिलकुल उसी तरह जिस तरह बनी-इस्राईल के यहाँ इस...

वतनियत की हक़ीक़त

इन्सान जिस जगह पैदा होता है उसका रक़बा (क्षेत्रफल) यक़ीनन एक गज़ स्क्वायर से ज़्यादा नहीं होता। इस रक़बे को अगर वो अपना वतन ठहरा दे तो शायद वो किसी देश को अपना वतन नहीं कह सकता। लेकिन वो उस छोटे से रक़बे के आसपास मीलों और कोसों और कभी-कभी...

ईमान और आमाले-सालेहा

दीने-इस्लाम में 'ईमान' और 'आमाले-सालेहा' (नेक आमाल, अच्छे अख़लाक़) दो ऐसी ख़ूबियाँ हैं जिनसे ख़ुशहाली के दरवाज़े खुलते हैं और नेकियाँ फैलती हैं। अगर ये दोनों ख़ूबियाँ इन्सानों में जमा हो जाएँ तो वो तमाम ख़ूबियाँ उनके अन्दर जमा हो जाएँगी जो ज़िन्दगी में मतलूब हैं। इस तरह के लोगों...

इक़बाल : साहिबे – क़ुरआँ व बे-ज़ौक़े – तलब !

साहिबे - क़ुरआँ व बे-ज़ौक़े - तलब ! अल-अजब, सुम्मल-अजब, सुम्मल-अजब ! तशरीह : कितने हैरत की बात है कि कोई शख़्स या कोई क़ौम अपने पास क़ुरआन जैसी इन्क़िलाबी किताब रखती हो और वो मुर्दा हो यानी कुछ कर गुज़रने या कुछ हासिल करने की ख़ाहिश उसके दिल में...

बुरा है वो बन्दा

रसूलुल्लाह (सल्ल०) ने फ़रमायाा : बुरा है वो बन्दा जो तकब्बुर करे और इतराए और अल्लाह बुज़ुर्ग व बरतर को भूल जाए; और बुरा है वो बन्दा जो मज़लूमों पर क़हर ढाए, ज़ुल्म-ज़्यादती करे और अल्लाह जब्बारे-रतर को भूल जाए; और बुरा है वो बन्दा जो खेल-तमाशे में मशग़ूल हो...

इस्लाम की दावत का फ़ितरी तरीक़ा

इस्लाम की दावत का फ़ितरी तरीक़ा ये है कि हम ग़ैर-मुस्लिमों को मुसलमान बनाने की फ़िक्र न करें बल्कि ख़ुद मुसलमानों को मुसलमान बनाने की फ़िक्र करें। ग़ैर-मुस्लिमों के सामने उनकी किताबों से हवाले देकर इस्लाम की हक़्क़ानियत को साबित करने की बजाय मुसलमानों को उनकी असल किताब क़ुरआन से...

रमज़ान महीना है सब्र का

हदीस में आता है कि रमज़ान सब्र का महीना है। (नसाई : 2410) और सब्र का बदला जन्नत है। सब्र वो ख़ूबी है जिसके बग़ैर दुनिया का कोई बड़ा काम अंजाम नहीं दिया जा सकता, जिसके बग़ैर किसी आला तहज़ीब और बेहतरीन समाज का तसव्वुर तक नहीं किया जा सकता।...

ईमान और उसकी क़िस्में

क़ुरआन के मुताले से ये बात मालूम होती है कि ईमान के बग़ैर कोई शख़्स जन्नत में नहीं जा सकता। ईमान के बग़ैर अगर कोई शख़्स नेक अमल भी करता है तो उसके उन नेक आमाल का बदला दुनिया में ही दे दिया जाएगा, आख़िरत में उसके इन नेक आमाल...

रमज़ान महीना है शुक्र का

क़ुरआन में जहाँ रोज़े का मक़सद तक़वा हासिल करना बताया है वहीँ इस माह में जो हिदायत-नाम (क़ुरआन) नाज़िल किया गया उसकी हिकमत बताते हुए फ़रमाया ताकि तुम (अपने रब का) शुक्र अदा करो। (सूरा 2 : 185) शुक्र वो ख़ूबी है जिसे इख़्तियार करने से इन्सान कभी अल्लाह की...

इस्लाम का शजरे-तैयबा साया कब देगा

अगर किसी शख़्स ने अपने पेड़ की जड़ों को ख़ुद ही काट डाला हो तो क्या वो- -उस पेड़ की ठण्डी छाँव से फ़ायदा उठा पाएगा? -उस पेड़ के मीठे और रसीले फलों का लुत्फ़ उठा पाएगा? -उस पेड़ की शाख़ों और पत्तों को सूखने और टूटने से बचा पाएगा?...