Afrad key hathon mein hai aqwam ki taqdeer

अफ़राद के हाथों में है अक़वाम की तक़दीर।हर फ़र्द है मिल्लत के मुक़द्दर का सितारा।। मेरे नौजवान साथियो! शायद तुम्हें मालूम नहीं है कि तुम्हारी क़ौम किस क़दर पस्ती का शिकार है।इस क़ौम को अगर कोई पस्ती से निकाल सकता है तो वो तुम हो। तुम ही इस क़ौम के...

Aao ladna seekhein

आओ लड़ना सीखें लड़ना इन्सान की फ़ितरत में शामिल है। अपनी बक़ा (Survival) के लिये उसे हर वक़्त लड़ना ही पड़ता है। हमारा ज़िन्दा जिस्म इस बात की अलामत है कि हम ज़िन्दगी की जंग में हर लम्हा मौत से जीत रहे होते हैं। हर नफ़स उम्रे-गुज़िश्ता की है मय्यत...

Ummat ka Bukhar

उम्मत का बुख़ार पिछले क़रीब 4 दिन लगातार बुख़ार की हालत से गुज़रा। बुख़ार की शुरुआत बहुत तेज़ सर्दी के साथ होती। बॉडी के अन्दर इन्तिहाई क़िस्म की कपकपाहट (shivering) होने लगती, जिसकी शिद्दत का अन्दाज़ा इससे लगाया जा सकता है कि तीन-चार लिहाफ़ भी कम पड़ जाते थे लेकिन...

Aalim Nabiyon key waris kis tarah hain?

आलिम नबियों के वारिस किस तरह हैं? बेशक उलमाए-हक़, नबियों (अलैहि०) के वारिस और जानशीन हैं। (हदीस) उनका अंबिया का वारिस होना उसी वक़्त दुरुस्त और मुकम्मल हो सकता है जबकि उनकी ज़िन्दगी का मक़सद और उनकी कोशिशों का मरकज़ भी वही हो जो नबियों का था। वो मक़सदे-ज़िन्दगी और...

Wo ek Pal

वो एक पल इन्सान अगर वक़्त की अहमियत को न समझे तो सौ साल की उम्र भी किसी काम की नहीं। ऐसे शख़्स के लिये सुबह-शाम का ये सिलसिला महज़ एक सिलसिला है जिसमें खाने-पीने, सोने-जागने और ख़ाहिशात पूरी करने के अलावा ज़िन्दगी का कोई मक़सद नहीं। ऐसे शख़्स को...

Kab aaeygi Allah ki madad

कब आएगी अल्लाह की मदद दुनिया में क़ौमों की हार-जीत का क़ायदा ये है कि जो गरोह सरकशी में एक हद से बढ़ता है तो अल्लाह उसे किसी दूसरे गरोह के ज़रिए हटाता रहता है, जो कि पहले के मुक़ाबले लोगों के दरम्यान अद्लो-इन्साफ़ का नारा लेकर उठता है। “ये...

किसकी है ये ज़मीन?

अंबियाई दावत को अंबियाई तरीक़े से पहुँचाने की ज़रूरत है। हम मुसलमान चूँकि अंबियाई मिशन रखनेवाली एक उम्मत हैं। इस ऐतिबार से हमारी दावत भी अंबियाई होनी चाहिये और हमारा उस्लूब व लहजा भी और इसी के साथ मौक़ा व महल भी दुरुस्त होना चाहिये। (16:125) क़ुरआन के मुताले से...

कबीर : रहना नहिं देस बिराना है।

रहना नहिं देस बिराना है। यह संसार कागद की पुड़िया, बूँद पड़े घुल जाना है। यह संसार काँट की बाड़ी, उलझ-पुलझ मरि जाना है। यह संसार झाड़ और झाँखर, आग लगे बरि जाना है। कहत कबीर सुनो भाई साधो, सतगुरु नाम ठिकाना है॥ यह पराया देश है, यहाँ नहीं रहना...

मैराज के वाक़िए में पैग़ाम

पूरी इन्सानी तारीख़ में मुहम्मद (सल्ल०) की शख़्सियत एक ऐसी शख़्सियत है जिन्होंने दुनिया का सबसे अज़ीम कारनामा अंजाम दिया, इस लिहाज़ से आप (सल्ल०) दुनिया की सबसे अज़ीम शख़्सियत (Great Personality) हैं। लेकिन आम चलन के मुताबिक़ आप (सल्ल०) के माननेवालों ने आपकी शख़्सियत को इस तरह ग्लोरिफ़ाई करना...

समाज में पॉज़िटिव तब्दीली लाने के लिये दो चीज़ें

समाज में पॉज़िटिव तब्दीली लाने के लिये दो चीज़ें बहुत अहम हैं : एक ये कि जिस फ़र्द या गरोह को जिन उसूलों पर तब्दीली लानी है उसे उन उसूलों और बुनियादों का गहरा इल्म और शुऊर भी होना चाहिये और उनपर पुख़्ता यक़ीन भी। उन उसूलों पर ख़ुद पूरी...