मुसलमान क्या हैं और क्या नहीं हैं --- --- --- मुसलमान महज़ एक मज़हबी गरोह नहीं हैं कि वो इस्लाम के साथ कुछ आस्थाओं और अक़ीदों की बुनियाद पर चिमटे रहें। मुसलमान महज़ कोई कल्चरल ग्रुप भी नहीं हैं कि वो इस्लाम के साथ मुआशरती और तमद्दुनी हैसियत से वाबस्ता...
Mujh sey milna ho to
मुझसे मिलना हो तो --- --- --- मुझसे मिलना हो तो मैं अपने कलाम में उसी तरह मौजूद हूँ जिस तरह फूल में ख़ुशबू कहते हैं कि ईरान में एक बादशाह था जो कि शाइरी तो नहीं करता था, मगर शाइरी का ज़ौक़ रखता था। उसने एक बार बरजस्ता एक...
Hukmraani ka model
हुक्मरानी का मॉडल --- --- --- हज़रत उमर (रज़ि.) इस्लामी तारीख़ की अज़ीम शख़्सियत थे। उनको यह हरगिज़ गवारा न होता था कि खाने-पीने और रहन-सहन के मामले में आम लोगों पर किसी क़िस्म की बरतरी इख़्तियार करें। एक बार जब उनके दौरे-ख़िलाफ़त में सूखा पड़ा तो उन्होंने क़सम खा...
Rasulullah (sl) ki Dawate-Haq
रसूलुल्लाह (सल्ल०) की दावते-हक़ --- --- --- रसूलुल्लाह (सल्ल०) की दावते-हक़ ने इन्सानी दुनिया में वो अज़ीमुश्शान तब्दीली पैदा की जिसने दुनियाए-इन्सानियत की तारीख़ बदल कर रख दी, जिसने मुर्दा दिलों के अन्दर ज़िन्दगी की नई रूह फूँक दी और फिर दुनिया ने वो मंज़र देखा कि क़ातिल जो थे...
Kya Quran aaj ki Plural society k liye bhi Kitabe-Hidayat hai?
क्या क़ुरआन आज की प्लुरल सोसाइटी के लिये भी किताबे-हिदायत है? --- --- --- कुछ लोग मानते हैं कि क़ुरआन नबी के मिशन की रुदाद है, नबी का इन्क़िलाब एक मोजज़ा है और क़ुरआन उस मोजज़े का दस्तावेज़ है। क़ुरआन से इस प्लुरल सोसायटी के लिए कोई हिदायत तलाश करना...
Safein Kaj, Dil Pareshan, Sajdey be-zoq
इक़बाल : सफ़ें कज, दिल परीशाँ सजदा बे-ज़ौक़ --- --- --- सफ़ें कज, दिल परीशाँ सजदा बे-ज़ौक़।के जज़्बे-अन्दरूँ बाक़ी नहीं है।। दूसरे मिसरे के बारे में तो कुछ कहा नहीं जा सकता अलबत्ता ऐसा लगता है कि अल्लामा इक़बाल (रह०) ने पहला मिसरा सर्दी के मौसम में जुमे के दिन...
Muhabbat ki haqiqat
मोहब्बत की हक़ीक़त असल में मोहब्बत आज़ादी का नहीं बल्कि बंधन (ग़ुलामी) का नाम है। लेकिन इस बंधन में ऐसा आनंद होता है जो इंसान को दिखावटी आज़ादी से कई गुना ज़्यादा सुकून देता है। असल में मोहब्बत हर रास्ते पर चल देने का नाम नहीं है, बल्कि मोहब्बत किसी...
Nafs aur Rooh
नफ़्स और रूह --- --- --- हम आम तौर पर दो शब्दों का इस्तेमाल करते हैं — रूह और नफ़्स। क्या ये दोनों एक ही चीज़ हैं? अगर हाँ, तो इनकी हक़ीक़त क्या है? और अगर अलग-अलग हैं तो इनमें फ़र्क़ क्या है? क़ुरआन में दोनों शब्द आए हैं —...
Musalmanon ka Kaarnaama
मुसलमानों का कारनामा --- --- --- मुसलमानों का एक ज़बरदस्त कारनामा ये है कि इन्होंने क़ुरआन के अलफ़ाज़ को इस तरह याद रखा है कि जिसकी मिसाल दुनिया की तारीख़ में नहीं मिलती। मगर इसी के साथ-साथ एक बड़ा और बहुत बड़ा ज़ुल्म ये भी किया है कि इन्होंने क़ुरआन...
Label Deen ka aur Beej Mazhab ka
लेबल दीन का और बीज मज़हब का --- --- --- ख़िलाफ़ते-राशिदा के ख़ात्मे के बाद एक बहुत बड़ा हादिसा सिर्फ़ यही नहीं हुआ कि मुसलमानों की मुलूकियत क़ायम हो गई बल्कि इससे भी बड़ा हादिसा ये हुआ कि दीन का लेबल लगाकर मज़हब का बीज बो दिया गया था। फिर...