इस्लामी तहज़ीब

"आपसे जब इस्लामी तहज़ीब के बारे में सवाल किया जाता है तो आप झट से आगरे के ताजमहल की तरफ़ इशारा कर देते हैं मानो ये है इस तहज़ीब का सबसे ज़्यादा नुमायाँ नमूना। हालाँकि इस्लामी तहज़ीब सिरे ये है ही नहीं कि एक मैयत को सुपुर्दे-ख़ाक करने के लिये...

निज़ामे-तालीम और हमारे मसाइल

हमारे मसायल का हल तालीम में नहीं बल्कि निज़ामे-तालीम की दुरुस्ती में है। हमारी बदक़िस्मती ये है कि हमारा दानिशवर तबक़ा जो कुछ सोचता है वो इससे ज़्यादा कुछ नहीं है कि मुसलमान तालीम में आगे आएँ तभी इनका मसला हल होगा। मैं दावे के साथ ये बात कह सकता...

हर फ़र्द है मिल्लत के मुक़द्दर का सितारा

अफ़राद के हाथों में है अक़वाम की तक़दीर। हर फ़र्द है मिल्लत के मुक़द्दर का सितारा।। शायद तुम्हें मालूम नहीं है कि तुम्हारी क़ौम किस क़दर पस्ती का शिकार हो रही है। इस क़ौम को अगर कोई पस्ती से निकाल सकता है तो वो नौजवान है। मगर क्या वो नौजवान...

इस्लाम और नॅशनलिज़्म

इस्लाम का मक़सद ये है कि इन्सानों के दरमियान अख़लाक़ी व रूहानी रिश्ते क़ायम रहें, इन्हें बड़े पैमाने पर एक-दूसरे का मददगार बनाया जाए। नॅशनलिज़्म इन्सानों के दरमियान आलमी रिश्तों को नस्ली और वतनी भेदभाव की क़ैंची से काट देता है और क़ौमों के बीच नफ़रतें पैदा करके इन्सानों को...

अशआर

जब तक ख़यालात नहीं बदलेंगे ख़ुद से कभी हालात नहीं बदलेंगे अब ढूंढ कर लाने हैं जवाबात हमें चुप रहे तो सवालात नहीं बदलेंगे

Teacher Day

हज़रत मुहम्मद (सल्ल) ने फ़रमाया "........जिनसे तुम इल्म हासिल करो (यानि Teachers) उनके साथ ख़ाकसाराना (यानि नर्मी का) बर्ताव करो।" (हदीस बहवाला तबरानी)

ईदे-क़ुर्बां

जिन लोगों ने इस ईदे-क़ुर्बां पर हज़रत इबराहीम अलैहिस्लाम की क़ुर्बानियों से ताबीर ज़िन्दगी को याद करके ये अहद किया हो कि हम भी अल्लाह और उसके दीन के लिए अपना सब कुछ क़ुर्बान कर देंगे, जिन लोगों ने अहद किया हो कि हम अल्लाह की ख़ुशी के लिए हर...

समस्याओं का हल

जब तक इन्सान इन्सान की ग़ुलामी करता रहेगा, र्इश्वर के बजाए अपने ही जैसे मनुष्य के बनाए हुए क़ानून को माना जाता रहेगा, तब तक न तो किसी जगह शान्ति की स्थापना ही सम्भव है और न ही किसी जगह इंसान को सुख प्राप्त हो सकता है। इसी तरह रक्तपात...

इस्लामी क़ानून की ख़ुसूसियत

इस्लामी क़ानून अपनी तबीअत और मिज़ाज (स्वभाव) में ज़मीन पर बनने वाले सभी क़ानूनों से बिलकुल मुख़्तलिफ़ (भिन्न) है। इस्लामी क़ानून किसी एक तबक़े (वर्ग) के मफ़ाद (हित) में और किसी दूसरे तबक़े के ख़िलाफ़ नहीं है। बल्कि वह उस हस्ती की तरफ़ से नाज़िल (अवतरित) हुआ है जो ज़ात-ब्राद्रियों,...

अज़मते-रसूल (सल्ल०)

अज़मते-रसूल (सल्ल०) तक़रीबन तमाम ही नबियों के साथ ये हादिसा पेश आया है कि उनके बारे में लोग दो तरह की गुमराही में मुब्तिला हुए हैं. पहली गुमराही तो यह कि लोगों ने उनको ये कहकर मानने से इनकार कर दिया कि “तुम कुछ नहीं हो मगर वैसे ही इन्सान...