अक़्ल और हिदायत

इन्सान की ज़िन्दगी में रौशनी और आँख का ताल्लुक़ इतना गहरा और आपस में एक दुसरे से इतना जुड़ा हुआ है कि एक के बग़ैर दूसरी चीज़ का वुजूद बेमाना (meaningless) होकर रह जाता है। अगर रौशनी न हो तो इंसान आँखें रखने के बावजूद भी दुनिया की चीज़ों और...

फ़ितनाए-दज्जाल और सूरा कहफ़ Part-1

क़ुरआन मजीद एक ऐसी किताब है कि अगर मुसलमान इसका हक़ अदा करें तो ये उन्हें तरक़्क़ी के बुलन्द मक़ाम पर पहुँचा सकती है, हक़ अदा न करने की सूरत में पस्ती की हालत तो सारा ज़माना देख ही रहा है।अल्लाह के रसूल (सल्ल०) ने मुसलमानों के अन्दर क़ुरआन का...

ईमान और अख़लाक़

इन्सान की सबसे निचली सतह ये है कि वो सिर्फ़ अपने ऐश व आराम या अपने घर-ख़ानदान की बेजा मुहब्बत में पड़ जाए; हक़ की राह में आनेवाली परेशानियों से डरने लगे और बातिल को ताक़तवर देखकर उसकी ग़ुलामी क़बूल करने पर आमादा हो जाए।ये कमज़ोरी हक़ीक़त में जिस्म व...

ईमान के दायरे और आमाले-सालेहा पर उनके असरात

'ईमान' की सादा सी डेफ़िनिशन तो ये है कि "ग़ैबी हक़ीक़तों के बारे में नबियों ने जो ख़बर दी है उनको ज़बान से इक़रार करना और दिल से उनकी तस्दीक़ करना ईमान कहलाता है।"इन ग़ैबी हक़ीक़तों को तीन हिस्सों में तक़सीम किया गया है : पहली हक़ीक़त ये कि कायनात...

सारी उम्मत जन्नत में जाएगी

كُلُّ أُمَّتِي يَدْخُلُونَ الْجَنَّةَयानी "मेरी उम्मत का एक-एक फ़र्द जन्नत में जाएगा।" (हदीस) इस जुमले ने मुसलमानों में इतनी शोहरत पाई है कि यक़ीन के दर्जे को हासिल कर लिया है और मुसलमानों को अमल से फ़ारिग़ कर दिया है, बिलकुल उसी तरह जिस तरह बनी-इस्राईल के यहाँ इस बात...

ईमान के दायरे और आमाले-सालेहा पर उनके असरात

'ईमान' की सादा सी डेफ़िनिशन तो ये है कि "ग़ैबी हक़ीक़तों के बारे में नबियों ने जो ख़बर दी है उनको ज़बान से इक़रार करना और दिल से उनकी तस्दीक़ करना ईमान कहलाता है।"इन ग़ैबी हक़ीक़तों को तीन हिस्सों में तक़सीम किया गया है : पहली हक़ीक़त ये कि कायनात...

ईमान और आमाले-सालेहा

दीने-इस्लाम में 'ईमान' और 'आमाले-सालेहा' (नेक आमाल, अच्छे अख़लाक़) दो ऐसी ख़ूबियाँ हैं जिनसे ख़ुशहाली के दरवाज़े खुलते हैं और नेकियाँ फैलती हैं। अगर ये दोनों ख़ूबियाँ इन्सानों में जमा हो जाएँ तो वो तमाम ख़ूबियाँ उनके अन्दर जमा हो जाएँगी जो ज़िन्दगी में मतलूब हैं। इस तरह के लोगों...

अज़मते-रसूल (सल्ल०)

तक़रीबन तमाम ही नबियों के साथ ये हादिसा पेश आया है कि उनके बारे में लोग दो तरह की गुमराही में मुब्तिला हुए हैं. पहली गुमराही तो यह कि लोगों ने उनको ये कहकर मानने से इनकार कर दिया कि “तुम कुछ नहीं हो मगर वैसे ही इन्सान जैसे हम...

FIFA World Cup 2022

क़ुरआन को किताबी शक्ल में नहीं अमली शक्ल में पेश करने का वक़्त है क़ुरआन मजीद को लोगों के हाथों में पहुँचा देना या उनके सामने पढ़कर सुना देना ही असल काम नहीं है, बल्कि इससे भी आगे बढ़कर असलन जो काम करने का है वो ये है कि मुसलमान...

अल्लाह का रंग

किसी से हद दर्जे महब्बत का मतलब है उसके रंग में रंग जाना। ये महब्बत जिससे भी हो जाती है उसे दीवाना बना देती है।इश्क़ की चोट तो पड़ती है जिगर पर यकसाँ।ज़र्फ़ के फ़र्क़ से आवाज़ बदल जाती है।।दुनिया में महब्बत के लिए अच्छी-बुरी, छोटी-बड़ी, खरी-खोटी बहुत सी चीज़ें...