मज़हब एक ऐसी अफ़ीम है जो डायरेक्ट दिमाग़ पर असर करती है और दिलों में दूसरों के लिये नफ़रत पैदा कर देती है, जिससे पूरा जिस्म ही नहीं बल्कि पूरा समाज मफ़लूज होकर रह जाता है। जबकि इस्लाम महज़ एक मज़हब नहीं बल्कि वो एक दीन है और इस तरह...
इख़्तिलाफ़ के मुसल्लेमा उसूल
दो या दो से ज़्यादा समझदार लोगों का एक साथ रहते हुए रायों में इख़्तिलाफ़ होना उतना ही फ़ितरी है जितना की अल्लाह की इस कायनात में इन्सानों का शक्ल व सूरत में, आदत व अतवार में, रंग और बोली वग़ैरा में मुख़्तलिफ़ होना। हर शख़्स का किसी चीज़ को...
तक़वा और शुह्हे-नफ़्स
तक़वा क़ुरआन मजीद के Key Words में से है बल्कि ये क़ुरआन मजीद की उन अहम इस्तिलाहात (Terminologies) में से है जिनकी तरफ़ अल्लाह ने आम तौर से अपने तमाम बन्दों को लेकिन ख़ास तौर से तमाम मुसलमानों को बार-बार तवज्जोह दिलाई है। तक़वा का मतलब होता है "अल्लाह की...
मसलकों और जमाअतों के तअस्सुब से बाहर आइये
उम्मत के लिये ये बात किसी अलमिये (दर्दनाक वाक़िए) से कम नहीं है कि जो मसलक फ़ुरुई (जुज़्वी और मामूली) मामलों में रहनुमाई के लिये वुजूद में आए थे वो मसलक आज दीन की हैसियत इख़्तियार कर गए हैं। ये नासूर हमारी उम्मत में इस हद तक सरायत कर गया...
ख़ुशगवारियाँ
कितनी ख़ुशगवारियाँ पैदा हो जाएँ मियाँ-बीवी के रिश्ते में जबकि- बीवी अपने शौहर के लिये ज़मीन बन जाए और शौहर अपनी बीवी के लिये आसमान! बीवी बिस्तर बन जाए और शौहर बुलन्द व बाला इमारत! बीवी अपने शौहर के लिये लौंडी बन जाए और शौहर अपनी बीवी के लिये ग़ुलाम!...
बेहतरीन लोग
बेहतरीन औलाद वो है जो माँ-बाप का इतना एहतिराम करे कि उनके सामने उफ़्फ़ तक न कहे। (क़ुरआन) और बेहतरीन माँ-बाप वो हैं जो अपनी औलाद और उनकी औलाद के साथ इज़्ज़त के साथ पेश आएँ। (हदीस : इब्ने-माजा 3671) बेहतरीन औलाद वो है जो अपनी दौलत और माल-अस्बाब सब...
सुलूके क़ुरआनी
क़ुरआन समझने की सारी तदबीरों के बावुजूद आदमी क़ुरआन की रूह से पूरी तरह वाक़िफ़ नहीं होने पाता, जब तक कि अमली तौर पर वो काम न करे जिसके लिये क़ुरआन आया है। ये सिर्फ़ नज़रियों और ख़यालों की किताब नहीं है कि आप आराम कुर्सी पर बैठकर इसे पढ़ें...
क्रिसमस
क़ुरआन-मजीद और इंजीले-मुक़द्दस की कॉमन तालीमात का ख़ुलासा (आओ ऐसी बात पर मुत्तफ़िक़ हो जाएँ जो हमारे और तुम्हारे दरम्यान कॉमन हैं) अल्लाह ने इंसान को पैदा किया और उसे अक़्ल व शुऊर से नवाज़ा। इंसान को बहुत-से मामलों में आज़ादी और इख़्तियार अता किया ताकि अल्लाह ये देख सके...
नया साल और गया साल
इक अजनबी के हाथ में दे कर हमारा हाथ। लो साथ छोड़ने लगा आख़िर ये साल भी।। दोस्तो! ज़िन्दगी के पेड़ से एक और पत्ता गिर कर ढेर में गुम हो गया है। ज़माने की गर्दिश में से इक और साल गुज़र कर तारीख़ का हिस्सा बनने जा रहा है...
प्यारी बहनों से एक अपील
प्यारी बहनो! हमारे समाज में महिलाओं के साथ जो अत्याचार हो रहा है, उनका जो sexual harassment (यौन शोषण) हो रहा है इसका गम्भीरता के साथ नोटिस लिया जाना चाहिये और कोई सोलुशन ज़रूर तलाश करना चाहिये। इसके लिये हमें किसी भी प्रकार के पक्षपात से मुक्त होकर विचार करना...