*प्रेम क्या है?* प्रेम प्रेम सब कहें, प्रेम न चिन्है कोई। आठ पहर भीना रहे, प्रेम कहाबै सोई।।* किसी के प्रति मात्र सामयिक रूप से आकर्षित हो जाने को प्रेम नहीं कहते, बल्कि प्रेम कहते हैं किसी के प्रति अपने आपको शाशवत रूप से समर्पित कर देने को। और ऐसा...
बुलबुल के कारोबार पे हैं ख़ंदा-हा-ए-गुल
बुलबुल के कारोबार पे हैं ख़ंदा-हा-ए-गुल कहते हैं जिस को इश्क़ ख़लल है दिमाग़ का ------- मुश्किल अलफ़ाज़ ख़ंदा-हा-ए-गुल = तमाम फूलों की हँसी ख़लल = बिगाड़, पागलपन, फ़तूर ------- मतलब बुलबुल गुल का आशिक़ होता है। इस आशिक़ी में वो दीवाना होता है। लेकिन गुल इस इश्क़ के अंजाम...
क्या गुरु भगवान होता है?
भारतीय धर्म ग्रन्थों में गुरु की बड़ी महिमा बयान की गई है। हमें बताया जाता है कि गुरु ही भगवान है, बल्कि गुरु का मर्तबा और उसकी श्रेणी भगवान से भी बढ़कर है। अगर हम संस्कृति की बात करें तो हमें कोई अधिकार नहीं पहुँचता कि हम किसी की संस्कृति...
समाज में बदलाव
सोच बदलेंगे तो अक़ीदा बदलेगा। अक़ीदा बदलेगा तो मिज़ाज बदलेगा। मिज़ाज बदलेगा तो किरदार बदलेगा। किरदार बदलेगा तो समाज में वो इन्क़िलाब बरपा होगा जिसकी जड़ें इन्तिहाई मज़बूत और जिसके असरात बहुत दूर-रस होंगे। इसलिए अगर समाज में कोई मुसबत तब्दीली लानी है तो सोच को बदलें यानी ख़ुद भी...
रसूल किस लिये आता है
ख़ुदा की तरफ़ से रसूल इसलिये नहीं आता है कि बस उसकी रिसालत (पैग़म्बरी) पर ईमान ले आओ और फिर इताअत जिसकी चाहो करते रहो, बल्कि रसूल के आने का मक़सद ही ये होता है कि ज़िन्दगी का जो ज़ाब्ता और क़ानून वो लेकर आया है, तमाम ज़ाब्तों और क़ानूनों...
उलमाए-हक़ और उलमाए-सू
उलमा दो क़िस्म के होते हैं, उलमाए-हक़ और उलमाए-सू। जिस शख़्स का ख़ुद का ताल्लुक़ क़ुरआन से मज़बूत हो और उसपर अमल करता हो और अवाम के ताल्लुक़ को भी क़ुरआन से मज़बूत करने की कोशिश करता हो, यानी क़ुरआन ही उसकी ज़िन्दगी का मिशन हो और अपनी ज़ात में...
मेरा फ़ेवरेट स्कॉलर
मेरा फ़ेवरेट स्कॉलर वही है जो... * क़ुरआन पर अमल करता हो और लोगों में क़ुरआन की समझ पैदा करने में मदद करता हो, लेकिन अहले-क़ुरआन होकर न रह गया हो। * हदीस की अच्छी समझ रखता हो और लोगों को सही और कमज़ोर हदीसों की तमीज़ के साथ अच्छी...
मुसलमानो आओ कॉमन बातों पर मुत्तफ़िक़ हो जाएँ
"(ऐ नबी) कह दीजिए कि ऐ अहले-किताब आओ एक ऐसी बात की तरफ़ जो हमारे और तुम्हारे दरमियान कॉमन है.....।" (क़ुरआन 3:64) मुसलमानों में जितने मकातिबे-फ़िक्र (school of thoughts) पाए जाते हैं उन सबका मुश्तरिका अक़ीदा है कि इस्लाम इन्सानियत के लिए अल्लाह रब्बुल-आलमीन की सबसे अज़ीम नेमत है। लेकिन...
ज़ाकिर नाइक को जवाब
ज़ाकिर भाई के ज़िक्र ने वाजिद भाई को पाने के बजाय खो दिया कितना अच्छा होता कि वाजिद भाई को ये कह कर ज़लील न किया गया होता कि "तू काफ़िर और मुरतद हो गया है," बल्कि उनको ये हौसला दिया गया होता कि "किसी शख़्स का किसी से कुछ...
तेरे सिवा कोई शाइस्ताए-वफ़ा भी तो हो।
तेरे सिवा कोई शाइस्ताए-वफ़ा भी तो हो। मैं तेरे दर से जो उठूँ तो किस के दर जाऊँ।। तू ही तो हमारा सरपरस्त व कारसाज़ है, लिहाज़ा (ऐ हमारे मौला! जो ख़ताएँ हमसे हो जाएँ उनके बुरे नतायज से) हमारी हिफ़ाज़त फ़रमा, हमें अपनी रहमत से ढाँप ले, तू सबसे...