बग़ैर हवाले के कोई बात कहना और सुनना

साथियो! मुसलमान होने के नाते जिस दीन को हम फ़ॉलौ करते हैं वो बहुत ही सटीक और सीधा दीन है। इसमें किसी तरह की कोई ऐंच-पेंच और टेढ़ नहीं है। (क़ुरआन 18:1) कभी-कभी हम इस्लाम की कोई बात बयान करते हुए हद से इतना आगे निकल जाते हैं कि उसके...

शबे-बरात की हक़ीक़त

15 शाबान को जब रसूलुल्लाह (sl) रात को उठकर जन्तुल-बक़ी गए थे(*) तो क्या वहाँ से वापस आकर लोगों को किसी इबादत की ताकीद की थी ? जवाब है "नहीं"। (इस सिलसिले में जिस हदीस से इबादत करने की ताकीद साबित की जाती है वो हदीस ज़ईफ़ है। देखें इब्ने-माजा...

अंबियाँ के वाक़िआत से सही सबक़

हमें हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) के आग में डाले जाने और फिर आग के गुलज़ार बन जाने का क़िस्सा तो ख़ूब सुनाया जाता है मगर ये बात यकसर नज़र-अन्दाज़ कर दी जाती है कि हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) का मुल्क के हुक्मराँ के साथ असल झगड़ा इस बात पर था कि मुल्क...

तबाह करने वाली चीज़ों से बचाओ

हमारे मुआशरे में कुछ शख़्सियात और कुछ चीज़ें ऐसी हैं कि जिनका अदब व एहतिराम, पास व लिहाज़ बहुत ज़रूरी है, लेकिन ये भी देखा जाते रहना चाहिये कि कहीं ये आपकी ज़िन्दगी को तबाह और आख़िरत को बर्बाद तो नहीं कर रहे हैं? *1) वालिदैन :* वालिदैन का अदब...

रमज़ान की आमद

अलहम्दुलिल्लाह रमज़ान का मुबारक महीना हमारे ऊपर साया-फ़िगन हो चुका है। आइये अहद करते हैं कि हम इस महीने के आख़िर तक अपने अन्दर कुछ मुस्बत (Positive) बदलाव ला चुके होंगे क्योंकि रमज़ान तब्दीली का महीना है। इसके लिये हम अहद करें कि हम अपने ऊपर काम करेंगे। आज हम...

रोज़े और क़ियामुल्लैल से क्या वाक़ई गुनाह माफ़ हो जाते हैं?

مَنْ صَامَ رَمَضَانَ إِيمَانًا وَاحْتِسَابًا غُفِرَ لَهُ مَا تَقَدَّمَ مِنْ ذَنْبِهِ ، وَمَنْ قَامَ لَيْلَةَ الْقَدْرِ إِيمَانًا وَاحْتِسَابًا غُفِرَ لَهُ مَا تَقَدَّمَ مِنْ ذَنْبِهِ . नबी (सल्ल०) ने फ़रमाया जो शख़्स रमज़ान के रोज़े ईमान और एहतिसाब (हुसूले-अज्र व सवाब की नीयत) के साथ रखे, उसके पिछले तमाम गुनाह माफ़...

आज इन्सानों को किस तरह के किरदार की ज़रूरत है?

अगर आप दर्द की शदीद तकलीफ़ में मुब्तला हैं तो ऐसे में तीन किरदारों में से आप किसे पसन्द करेंगे: एक वो शख़्स है जो आपकी तकलीफ़ को देखकर आपसे कहता है कि आप बहुत तकलीफ़ में मुब्तला हैं लिहाज़ा मैं आपके लिये अल्लाह से दुआ कर सकता हूँ, क्योंकि...

शुक्र अदा करते हुए सब्र करनेवाले रोज़ेदार

“खाना खाकर अल्लाह का शुक्र अदा करनेवाला सब्र करनेवाले रोज़ेदार के बराबर है।" (तिरमिज़ी : 2486) *तशरीह* : रोज़ेदार शख़्स रोज़े की हालत में ख़ुदा के लिए सब्र (कंट्रोल) करता है और खाने-पीने और जिंसी ख़ाहिश पूरी करने से रुका रहता है और जब शाम हो जाती है तो खाता-पीता...

हमवार ज़मीन और सही सालिम बीज

अगर ज़मीन को हमवार करके खेत में सही-सालिम बीज न डाला जाए तो दो नतीजे बरामद होते हैं : 1) अगर ज़मीन बिलकुल बंजर है तो कोई पौधा उगेगा ही नहीं, सिवाय काँटेदार झाड़ियों के। फिर ज़मीन जितनी पथरीली होगी ये काँटेदार झाड़ियाँ भी उतनी ही सख़्त और मज़बूत होंगी।...

जिस तरह

जिस तरह कोई पेड़ जब फूल, फल और साया देना बन्द कर देता है तो हम उसे मुर्दा क़रार देते हैं, जिस तरह कोई नदी जब अपने पानी से सैराब करना बन्द कर देती है तो हम उसे मुर्दा क़रार देते हैं, जिस तरह कोई चराग़ जब अपनी रौशनी से...