कब आएगी अल्लाह की मदद
दुनिया में क़ौमों की हार-जीत का क़ायदा ये है कि जो गरोह सरकशी में एक हद से बढ़ता है तो अल्लाह उसे किसी दूसरे गरोह के ज़रिए हटाता रहता है, जो कि पहले के मुक़ाबले लोगों के दरम्यान अद्लो-इन्साफ़ का नारा लेकर उठता है।
“ये तो ज़माने के उतार-चढ़ाव हैं जिन्हें हम लोगों के बीच गर्दिश देते रहते हैं।” (3:140) क्योंकि
“अगर इस तरह अल्लाह इन्सानों के एक गरोह को दूसरे गरोह के ज़रिए से हटाता न रहता तो ज़मीन का निज़ाम बिगड़ जाता।” यक़ीनन ये इसीलिये होता है कि “दुनिया के लोगों पर अल्लाह की बड़ी मेहरबानी है” (कि वो इस तरह बिगाड़ को दूर करने का इन्तिज़ाम करता रहता है।)(2:251)
यानी अल्लाह ने अपनी ज़मीन का इन्तिज़ाम बनाए रखने के लिये ये क़ायदा बना रखा है कि वो इन्सानों के अलग-अलग गरोहों को एक ख़ास हद तक तो ज़मीन में ग़लबा और ताक़त हासिल करने देता है, मगर जब कोई गरोह हद से बढ़ने लगता है तो किसी दूसरे गरोह के ज़रिए से उसका ज़ोर तोड़ देता है। अगर कहीं ऐसा होता कि एक फ़र्द, एक क़ौम और कम्युनिटी या किसी एक पार्टी ही की हुकूमत ज़मीन में हमेशा बाक़ी रखी जाती और उसका क़हर (ज़ुल्म) और उसकी नाइंसाफ़ी कभी ख़त्म होनेवाली न होती, तो यक़ीनन अल्लाह की ज़मीन में एक बड़ी तबाही और फ़साद पैदा हो जाता। पूरी दुनिया की तारीख़ भी और ख़ुद हमारे प्यारे मुल्क हिंदुस्तान की तारीख़ भी इस बात की गवाह है कि जब एक हुक्मराँ गरोह के पापों का घड़ा भर गया तो अल्लाह ने उसी जैसे दूसरे गरोह के ज़रिए उसे हटा दिया, अब जब इस गरोह ने भी नफ़रत को ही बढ़ावा दिया तो उसी जैसे एक दूसरे गरोह के ज़रिए हटाने का इंतिज़ाम कर दिया गया।
लेकिन इसका मतलब ये हरगिज़ नहीं है कि दुनिया में अम्न के क़ियाम की ज़िम्मेदारी अल्लाह ने जिस गरोह को सौंपी थी वो इसी तरह की उठापटख़ से ख़ुश होता रहे और समझता रहे कि अब हमारे करने का काम ख़ुद-बख़ुद ही हो रहा है, और हमारे करने का काम बस इतना है कि जो कम बुरा है उसी को सपोर्ट करते रहें। जिन लोगों को अल्लाह ने हक़ की गवाही देने और अम्न के क़ियाम की ज़िम्मेदारी सौंपी है ये उनके लिये बड़ी इम्तिहान की घड़ी होती है कि वो किसी कम बुरे गरोह को जिताने की जिद्दोजुहद में अपनी मेहनत व सलाहियतें लगाते रहेंगे या एक मुद्दत तक अपने करने के काम पर फ़ोकस करते रहेंगे और जैसे ही अल्लाह की तरफ़ से कोई मौक़ा मुयस्सर आए तो अम्नो-अमान के क़ियाम और अद्लो-इन्साफ़ की बहाली के लिये मन्ज़रे-आम पर आएँगे।
ये बात याद रखनी चाहिये कि अम्न के क़ियाम के लिये जिद्दोजुहद करने वाले गरोह के कामयाब होने के लिये भी ख़ुदा का एक क़ानून है और वो ये कि वो गरोह उस पैग़ामे-हक़ पर पहले ख़ुद खरा उतर कर दिखाए और फिर उसे पूरे यक़ीन और एतिमाद के साथ लोगों के दरमियान बेलाग तरीक़े से पहुँचाए। इस काम को करते हुए हो सकता है एक लम्बी मुद्दत तक आज़माइशों की भट्टी में तपाया जाए, लेकिन अपने सब्र का, अपनी सच्चाई का, अपनी क़ुरबानी और फ़िदाकारी का, अपने ईमान की मज़बूती और अल्लाह पर अपने भरोसे का इम्तिहान दें। मुसीबतों और मुश्किलों के दौर से गुज़रकर अपने अन्दर वो सिफ़ात परवान चढ़ाएँ जिन्हें देखकर लोग पुकार उठें कि यही हैं वो लोग जो ज़मीन पर हक़ और इंसाफ़ क़ायम कर सकते हैं। लिहाज़ा उनको चाहिये कि सबसे पहले हक़ीक़ी इल्म, बुलन्द अख़लाक़, सब्रो-रज़ा और तकरीमे-इन्सानियत के हथियारों से जाहिलियत पर फ़तह हासिल करके दिखाएँ। इस तरह जब वो ये साबित कर देंगे कि हम कुछ लेने नहीं बल्कि इन्सानियत को कुछ देने आए हैं, किसी ख़ास गरोह के दुश्मन नहीं बल्कि तमाम इन्सानों के ख़ैरख़ाह हैं, इन्सानों को ग़ुलाम बनाना नहीं चाहते बल्कि इन्सानों को इन्सानों की ग़ुलामी से निकालकर एक अल्लाह की ग़ुलामी में ला खड़ा करना चाहते हैं। तब अल्लाह की नुसरत और मदद ठीक अपने वक़्त पर उनका हाथ थामने के लिए आ पहुँचेगी। याद रखें कि वक़्त से पहले अल्लाह की ताईद और नुसरत किसी के लिये नहीं उतरा करती, यहाँ तक कि नबियों के लिये भी नहीं।
मुल्के-अज़ीज़ हिंदुस्तान में अल्लाह की तरफ़ से बार-बार इस बात के मौक़े मिलते रहे हैं और आज भी मिल रहे हैं। इस मौक़े को ग़नीमत जानते हुए हक़ का अलम्बरदार गरोह उठे और सबसे पहले वो ख़ुद अपने आपको हक़ पर चलनेवाला साबित करे, अपने-आपको लोगों और इन्सानी समाज का ख़ैरख़ाह साबित करे। लोगों को ये यक़ीन दिलाए कि वो कुछ लेने नहीं बल्कि देने के लिये वुजूद में आया है। इस तरह न सिर्फ़ आम लोगों की हिमायत उस गरोह को मुयस्सर आएगी बल्कि ख़ुदा की ताईद और नुसरत भी नाज़िल होगी। ये कम बुरे लोगों की ताईद और हिमायत करके ख़तरे को टालने की नाकाम कोशिश करते रहना या आनेवाले मुश्किल हालात से घबराकर ज़्यादा बुरे लोगों की ही गोदों में जाकर बैठ जाने से ख़ुदा के सामने जो ज़बरदस्त और दोहरी पकड़ होगी उसकी संगीनी का तो ख़ैर कोई अन्दाज़ा भी नहीं लगाया जा सकता बल्कि इस दुनिया में भी इन्सानियत को न कभी अद्लो-इन्साफ़ नसीब होगा और न कभी हक़ीक़ी अम्नो-सुकून मुयस्सर होगा।
अल्लाह हमारा हामी व नासिर हो।