हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन।
दिल के ख़ुश रखने को ग़ालिब ये ख़याल अच्छा है।।
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ग़ालिब कहते हैं कि जन्नत के बारे में ये ख़याल आम है कि जन्नत कुछ मज़हबी रस्में अदा करने या कुछ पूजा-पाठ कर लेने से हासिल हो जाएगी। और जन्नत में हर क़िस्म का लुत्फ़ और मज़ा होगा। घने बाग़ होंगे जिनके नीचे नहरें बह रही होंगी, शराब होगी, शबाब होगा, ऐश होगी वग़ैरा। जन्नत के बारे में ये बातें दिल को बहलाने का महज़ एक ख़याल हैं जिनकी कोई हक़ीक़त नहीं है। जन्नत कोई ऐसी चीज़ नहीं है कि महज़ चन्द रस्में अदा कर लेने से हासिल हो जाएगी। जन्नत एक ऐसी हक़ीक़त है जिसके लिये आपको अमल की दुनिया में जिद्दोजुहुद करनी होगी। किरदार को सँवारने की मुश्किलों से गुज़रना होगा। समाज में अम्नो-सलामती के क़ियाम की मशक़्क़तों से दो-चार होना पड़ेगा। नफ़रत के दरिया को मुहब्बत के सफ़ीने में बैठकर सब्रो-इस्तिक़ामत के साथ पार करना होगा। ख़ौफ़ और लालच के ओछे हथियारों के हमलों का दिफ़ाअ हक़ गोई और बेबाकी की ढाल से करना पड़ेगा। अगर कोई शख़्स ये सब नहीं करता तो जन्नत दिल को बहलाने का महज़ एक ख़याल है, इससे ज़्यादा कुछ नहीं।