करनी बिन कथनी कथे, अज्ञानी दिन रात।
कूकर सम भूकत फिरे, सुनी सुनाई बात ॥
अर्थ: कबीर दास कहते हैं कि अज्ञानी लोग रात-दिन वो बातें कहते फिरते हैं जिन पर वो ख़ुद अमल नहीं करते। यानी वो काम कम और बातें अधिक करते हैं। और जो कुछ वो बोलते हैं वो बातें उन्होंने ख़ुद नहीं पढ़ी होती हैं, न उन बातों पर उनकी अपनी कोई तहक़ीक़ होती है बल्कि वो सुनी सुनाई बातों को ही कुत्तों की तरह हर गली में जा कर भोंकते रहते हैं उनका अपना कोई तर्क नहीं होता है।
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