जो नौजवान सोशल मीडिया पर मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहफ़्फ़ुज़ की जंग लड़ रहे हैं और जिन मुस्लिम ख़वातीन ने सड़कों पर उतर कर मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहफ़्फ़ुज़ का नारा लगाया है उनके जज़्बात और दीन से लगाव की हम क़द्र करते हैं, उनको सलाम पेश करते हैं. लेकिन साथ ही इन्तिहाई अदब के साथ ये गुज़ारिश करना चाहते हैं कि ख़ुदा के वास्ते उलमा के चश्मे से दीन को देखना और घड़ी हुई रिवायात और क़िस्से-कहानियों के ज़रिए दीन को समझना और आँखें बन्द करके उसी की पैरवी किए चले जाना दीन से हक़ीक़ी मुहब्बत हरगिज़ नहीं हो सकती. दीन को अपनी आँखों से पढ़ने और अपने दिमाग़ से समझने की कोशिश कीजिए. उसी बात पर अमल करने की कोशिश कीजिए जो बात क़ुरआन से साबित हो. यक़ीन जानिए कि पर्सनल लॉ की हिफ़ाज़त करना ही आप पर फ़र्ज़ नहीं है, बल्कि पूरे का पूरा दीन आपकी तवज्जोह का तालिब है, पूरे के पूरे दीन पर अमल करना आप पर फ़र्ज़ है. (क़ुरआन 2:208)
ज़रा ग़ौर तो फ़रमाइए कि अगर पर्सनल लॉ हमारे इत्तिहाद की बुनियाद बन सकता है तो क़ुरआन क्यों नहीं बन सकता? क्या हम क़ुरआन और मुहम्मद (सल्ल०) के बताए हुए मक़सद को अपनी ज़िन्दगी का नस्बुल-ऐन बनाकर मुत्तहिद नहीं हो सकते? यक़ीनन हो सकते हैं और अब वक़्त आ गया है कि हमें उस पर मुत्तहिद होना ही पड़ेगा. वगरना हमारा पर्सनल लॉ तो क्या हमारी शनाख़्त और ईमान तक महफ़ूज़ न रहेगा और हम कुछ नहीं कर पाएँगे.
इस मौक़े पर हम क़ौम के उलमा से भी मुअद्दिबाना गुज़ारिश करना चाहते हैं कि ख़ुदा के वास्ते इन मुसलमानों (मर्द व ख़वातीन) की दीन से वाबस्तगी की क़द्र कीजिए. इनको पूरे का पूरा दीन पेश कीजिए, इनको बराहे-रास्त क़ुरआन से वाबस्ता कीजिए. ज़रा ग़ौर फ़रमाइए कि ये कितने अफ़सोस की बात है कि इस अवाम को (जिसने अपने दीन की समझ को आपके ऊपर गिरवी रख दिया है) आज तक निकाह व तलाक़ का सही तरीक़ा तक नहीं बताया जा सका है. अंबिया के वारिस होने के नाते आपका फ़र्ज़ है कि दीन को उसी तरह से इनके सामने पेश कीजिए जिस तरह प्यारे नबी (सल्ल०) ने पेश किया था और इस मिल्लत को उसी काम के लिए तैयार और trained कीजिए जिस काम के लिए आक़ा-ए-नामदार नबी-ए-आख़िरुज़्ज़माँ हज़रत मुहम्मद (सल्ल०) ने इसको तैयार किया था.
यक़ीन जानिए अगर आपने इस मिल्लत के नौजवान (मर्द व ख़वातीन) को उसी नहज पर उस्तुवार किया तो आपको पर्सनल लॉ की हिफ़ाज़त के लिए इनको जमा करने की ज़रूरत पेश नहीं आएगी बल्कि ये ख़ुद पूरे दीन को नाफ़िज़ और ग़ालिब करने की जिद्दो-जुहुद के लिए अपने-आपको पेश कर देंगे. जिससे अल्लाह का दीन अल्लाह की ज़मीन पर ग़ालिब हो सकेगा, पूरी इंसानियत को अमन-चैन की साँस लेना नसीब होगा और अल्लाह के दीन की नुसरत करनेवाले ये जियाले आख़िरत की फ़ौज़ व फ़लाह से हमकिनार होंगे.
Muhammad Ali Shah Shuaib