लीडर वो होता है जिसमें सही रहनुमाई करने की अहलियत और सलाहियत होती है। हम इस बात को इस तरह भी कह सकते हैं कि लीडर के अन्दर वो आला दर्जे की ज़हानत, मामला फ़हमी, मर्दम-शनासी होती है जिसके ज़रिए वो फ़ैसला लेने और क़ाफ़िले को अपने नज़रिये और फ़िक्र के मुताबिक़ सही सम्त दे सकता है। इसी के साथ लीडर फ़िक्र की पुख़्तगी और अख़लाक़ की बुलन्दी का वो मुरक्कब होता है जो किसी भी इन्सान को इस क़ाबिल बनाता है कि वो एक पूरी क़ौम को मुतास्सिर और उस पर अपना कन्ट्रोल रख सकता है।
कामयाब लीडर वही है जो न सिर्फ़ ख़ुद मुतहर्रिक रहता है बल्कि अपनी क़ौम को भी मुतहर्रिक रखता है।
एक बेहतरीन लीडर वही होता है जो अपने नज़रिये और फ़िक्र के मुताबिक़ ज़हानत और फ़िक्र के मुताबिक़ उस बुलन्द मक़ाम से रास्ते की अड़चनों को देख लेता है और वक़्त रहते बोहरान पर क़ाबू पाकर अपनी कश्ती को भँवर से निकालने में कामयाब हो जाता है।
शानदार लीडर वही होता है जिसे अपनी बसीरत (दिल की निगाहों) के ज़रिए रास्ते की कुशादगियों का इल्म इतने यक़ीन के साथ होता है गोया वो उस रास्ते से होकर आ गया है।
एक कामयाब लीडर अपने नज़रिये और फ़िक्र की कामयाबी पर इस क़द्र पुख़्ता यक़ीन रखता है कि उसे अपनी मंज़िल पर कामयाबी के साथ पहुँचने पर ज़र्रा बराबर भी शक और तज़बज़ुब नहीं होता है।
एक बेहतरीन लीडर की पहचान हस्सासियत होती है। वो शख़्स जिसके अन्दर की हिस ही मर गई हो और वो सिर्फ़ अपने और अपने ख़ानदान की बक़ा और बहबूद के बारे में ही सोचता हो वो कभी लीडर नहीं हो सकता अगर ज़बरदस्ती बन भी गया या बना दिया गया तो लीडरशिप का हक़ अदा नहीं कर सकता।