दीने-इस्लाम में ‘ईमान’ और ‘आमाले-सालेहा’ (नेक आमाल, अच्छे अख़लाक़) दो ऐसी ख़ूबियाँ हैं जिनसे ख़ुशहाली के दरवाज़े खुलते हैं और नेकियाँ फैलती हैं। अगर ये दोनों ख़ूबियाँ इन्सानों में जमा हो जाएँ तो वो तमाम ख़ूबियाँ उनके अन्दर जमा हो जाएँगी जो ज़िन्दगी में मतलूब हैं। इस तरह के लोगों के लिये अल्लाह ने जन्नत का वादा किया है और ऐसे लोगों से मिलकर जो समाज बनेगा उस समाज का हैप्पीनेस इंडेक्स समाज के मतलूब मानक (स्टैण्डर्ड) को पार कर जाएगा।
इन दोनों ख़ूबियों में आपस में बड़ा गहरा ताल्लुक़ है। मानो ये दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। अगर किसी एक हिस्से को रगड़कर ख़राब कर दिया जाए तो दूसरे हिस्से के चमकदार होने के बावजूद सिक्का खोटा हो जाएगा। हालाँकि वो कहलाएगा सिक्का ही, लेकिन वो अपने सिक्का होने की हैसियत खो देगा। क़ुरआन-हदीस के मुताले से मालूम होता है कि ‘ईमान’ दीन की रूह है तो ‘आमाले-सालेहा’ दीन का जिस्म (ज़ाहिरी ढाँचा) है। ‘आमाले-सालेहा’ ज़िन्दगी का असल सरमाया और ज़ीनते-हयात हैं तो ‘ईमान’ वो क़ुव्वत है जिससे इन्सान के तमाम नेक आमाल, अख़लाक़ व किरदार को मज़बूती और पायदारी हासिल होती है।
‘ईमान’ और ‘आमाले-सालेहा’ जिस्म और रूह की हैसियत रखते हैं। जिसमें असल हैसियत रूह (यानी ईमान) को हासिल है। यानी ‘ईमान’ वो चीज़ है जो ख़ुद ज़ाहिर नहीं होगा मगर ज़ाहिर पर पूरी तरह से असर-अन्दाज़ होकर रहेगा। अगर किसी शख़्स का ज़ाहिर अच्छा है यानी उसके पास ‘आमाले-सालेहा’ और ‘हुस्ने-अख़लाक़’ है लेकिन अन्दर ‘ईमान’ नहीं है तो ऐसे ‘आमाले-सालेहा’ मजमूई हैसियत से कभी पायदार नहीं हो सकते। बहुत जल्द उसके ज़ाहिर (आमाले-सालेहा) नापायदारी ज़ाहिर हो जाएगी। इसके बरख़िलाफ़ अगर कोई शख़्स अपने ज़ाहिर (आमाले-सालेहा और हुस्ने-अख़लाक़) के अन्दर ईमान (की रूह) रखता हो तो ये मुमकिन ही नहीं है कि उसका ज़ाहिर (आमाल और अख़लाक़) अच्छा न हो। इन्सान होने के नाते अगर उसके ज़ाहिर (आमाल) में कोई कमज़ोरी आ भी जाएगी तो ईमान की अन्दरूनी ताक़त उस कमज़ोरी को बहुत जल्द रफ़ू कर देगी।
लिहाज़ा अगर हम ये चाहते हैं कि हमारी ज़िन्दगी ‘आमाले-सालेहा’ और हुस्ने-अख़लाक़ की ख़ुश्बू से महकती रहे और हमारा समाज हुस्ने-अख़लाक़ की प्रैक्टिस से हैप्पीनेस इंडेक्स (ख़ुशहाली) के सबसे ऊँचे मानक (Standard) को पार कर जाए तो इसके लिये ‘ईमान’ पर मेहनत करना बहुत ज़रूरी है। इसके लिये ज़रूरी है कि हम ‘ईमान’ को अच्छी तरह समझ लें।