अलहम्दुलिल्लाह रमज़ान का मुबारक महीना हमारे ऊपर साया-फ़िगन हो चुका है।
आइये अहद करते हैं कि हम इस महीने के आख़िर तक अपने अन्दर कुछ मुस्बत (Positive) बदलाव ला चुके होंगे क्योंकि रमज़ान तब्दीली का महीना है।
इसके लिये हम अहद करें कि हम अपने ऊपर काम करेंगे। आज हम अपने बारे में सोचेंगे कि
1) हमारे अन्दर कौन-सी कमज़ोरी है जिसे इस माह में दूर करना चाहिये?
2) कौन-सी ख़ूबी ऐसी है जिसे इस माह में परवान चढ़ाना चाहिये?
हम अहद करें कि अपने अन्दर कम से कम किसी एक कमी को दूर करने की लगातार इस तरह कोशिश करेंगे कि महीने के आख़िर तक वो कमज़ोरी दूर हो जाए। मिसाल के तौर पर अगर हम में से किसी को ये एहसास हो कि मुझे ग़ुस्सा जल्द आता है, तो अहद करें कि इस माह में ग़ुस्सा नहीं करेंगे और अपने ऊपर इतना कण्ट्रोल करेंगे कि माह के आख़िर तक हम इस लायक़ हो पाएँ कि बाक़ी के ग्यारह महीने में ग़ुस्से पर क़ाबू करना हमारे लिये आसान हो जाए।
इसी तरह अगर हमें ये एहसास हो कि हमारे अन्दर कोई ऐसी ख़ूबी है जिसे परवान चढ़ाने से मेरी शख़्सियत के अन्दर निखार आएगा तो उस ख़ूबी को परवान चढ़ाने की कोशिश करेंगे।
आइये अहद करते हैं कि हम इस महीने में कुछ नया सीखेंगे क्योंकि रमज़ान सीखने (Training) का महीना है।
इसके लिये हम अहद करें कि हम रोज़ाना कोई नई बात सीखेंगे। मसलन
1) हम तय कर सकते हैं कि हम हर रोज़ क़ुरआन की कोई एक आयत तर्जमे के साथ याद कर लेंगे। इस तरह हम इस माहे-मुबारक के आख़िर तक पहुँचते-पहुँचते 30 आयतें हिफ़्ज़ कर चुके होंगे और उनके तर्जमे को भी समझ चुके होंगे। या
2) हम इस बात का अहद कर सकते हैं कि इस माहे-मुबारक के पहले अशरे में हम मुकम्मल नमाज़ तर्जमे के साथ सीख लेंगे, दूसरे अशरे में क़ुरआन मजीद की मुन्तख़ब दुआएँ तर्जमे के साथ याद कर लेंगे और आख़िरी अशरे में नमाज़े-जनाज़ा या कुछ मसनून दुआएँ तर्जमे के साथ याद कर चुकेंगे।
आइये अहद करते हैं कि इस माहे-मुबारक में हम अपनी क़ुव्वते-कार (Work Efficiency) और क़ुव्वते-बर्दाश्त (Patience) को बढ़ाएँगे। क्योंकि ये महीना सब्र और जफ़ा-कशी की प्रैक्टिस का महीना है।
इसके लिये अहद करें कि
1) इस माह में हम आम दिनों से ज़्यादा काम करेंगे और इस तरह अपने अन्दर क़ुव्वते-कार (Work Efficiency) को बढ़ाएँगे कि बाक़ी के ग्यारह महीनों में भी लोग हमारे काम से ख़ुश हों, हमारी तरक़्क़ी हो और हमारे घर और समाज में ख़ुशहाली आए।
इसी तरह हम इस बात का भी अहद करें कि
2) इस माह में किसी से नहीं लड़ेंगे, किसी से डाँट-डपट नहीं करेंगे, तू-तू-मैं-मैं की नौबत नहीं आने देंगे। और हम अपने अन्दर क़ुव्वते-बर्दाश्त को इतना पुख़्ता कर लेंगे कि बाक़ी के ग्यारह महीनों में हमें जहाँ लड़ने-झगड़ने की नौबत आ जाए वहाँ हम सिर्फ़ डाँट-डपट से ही काम चला लें और जहाँ कहीं तू-तू, मैं-मैं की नौबत आए वहाँ हम अफ़्व व दरगुज़र से काम चला लें।
यक़ीन जानिये अगर हमने अपने इस अहद को वफ़ा किया तो ये माह हमारे अन्दर बहुत बड़ी तब्दीली पैदा कर सकता है। लिहाज़ा
जो लोग ये अहद करें उनको ये महीना बहुत-बहुत मुबारक हो क्योंकि उनके अन्दर इन्शाअल्लाह एक बड़ी तब्दीली आने वाली है
और जो लोग ये अहद न करें उनके लिये दुआ है कि अल्लाह उनके अन्दर इस माह की क़द्र करने का जज़्बा और हौसला पैदा करे।