मेरा फ़ेवरेट स्कॉलर वही है जो…
* क़ुरआन पर अमल करता हो और लोगों में क़ुरआन की समझ पैदा करने में मदद करता हो, लेकिन अहले-क़ुरआन होकर न रह गया हो।
* हदीस की अच्छी समझ रखता हो और लोगों को सही और कमज़ोर हदीसों की तमीज़ के साथ अच्छी तरह समझाता भी हो, लेकिन अहले-हदीस होकर न रह गया हो।
* तौहीद-ए-ख़ालिस पर पुख़्ता यक़ीन रखता हो और समाज में तौहीद को क़ायम करने के लिए जिद्दोजुहद करता हो, लेकिन देवबंदी या किसी ख़ास जमाअत का होकर न रह गया हो।
* रसूल ﷺ से बेपनाह मोहब्बत करता हो और आप ﷺ के कारनामों से लोगों को मुतआरिफ़ कराता हो, लेकिन बरेलवी होकर न रह गया हो।
* अहले-बैत की दीन के लिये ख़िदमतों और क़ुर्बानियों का दिल से एतिराफ़ करता हो और उनके नक़्श-ए-क़दम पर चलता हो, लेकिन शिआ बनकर न रह गया हो।
जब उससे कोई पूछे कि तुम कौन हो, तो वो हमेशा यही कहे कि मैं तो अल्लाह का फ़रमाँबरदार हूँ,
उम्मत-ए-मुस्लिम का एक अदना सा फ़र्द हूँ।
वो हमेशा कहता हो कि:
# “आओ एक ऐसी बात की तरफ़ जो हमारे और तुम्हारे दरमियान यक्सां हो, कि हम सब उस एक अल्लाह के अलावा किसी की बंदगी और ग़ुलामी न करें।”
(मफ़हूम क़ुरआन 3:64)
“قُلْ يَا أَهْلَ الْكِتَابِ تَعَالَوْا إِلَىٰ كَلِمَةٍ سَوَاءٍ بَيْنَنَا وَبَيْنَكُمْ أَلَّا نَعْبُدَ إِلَّا اللَّهَ وَلَا نُشْرِكَ بِهِ شَيْئًا”
# “आओ हम सब मिलकर एक अल्लाह की रस्सी को मज़बूती से पकड़ लें और तफ़रिक़े में न पड़ें।”
(मफ़हूम क़ुरआन 3:103)
“وَاعْتَصِمُوا بِحَبْلِ اللَّهِ جَمِيعًا وَلَا تَفَرَّقُوا”
# “आओ हम सब मिलकर उसी दीन को क़ायम करने की जिद्दोजुहद करें जिसे क़ायम करने के लिये मुख़्तलिफ़ अंबिया को भेजा गया था।”
(मफ़हूम क़ुरान 45:17, 18)
# “यक़ीनन तुम्हारी ये उम्मत एक ही उम्मत है, तुम्हारा रब भी एक ही है, तुम बस उसी से डरते रहो।”
(मफ़हूम क़ुरान 23:52)
“إِنَّ هَذِهِ أُمَّتُكُمْ أُمَّةً وَاحِدَةً وَأَنَا رَبُّكُمْ فَاتَّقُونِ”