तेरे सिवा कोई शाइस्ताए-वफ़ा भी तो हो।
मैं तेरे दर से जो उठूँ तो किस के दर जाऊँ।।
तू ही तो हमारा सरपरस्त व कारसाज़ है, लिहाज़ा (ऐ हमारे मौला! जो ख़ताएँ हमसे हो जाएँ उनके बुरे नतायज से) हमारी हिफ़ाज़त फ़रमा, हमें अपनी रहमत से ढाँप ले, तू सबसे बढ़कर माफ़ करनेवाला और बख़्शने वाला है। (आराफ़ : 155)
اَنۡتَ وَلِیُّنَا فَاغۡفِرۡ لَنَا وَ ارۡحَمۡنَا وَ اَنۡتَ خَیۡرُ الۡغٰفِرِیۡنَ
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