रगों में दौड़ते फिरने के हम नहीं क़ायल।
जब आँख ही से न टपका तो फिर लहू क्या है?
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मतलब
इन्सान के जिस्म की रगों में ख़ून की गर्दिश को लेकर तीन कैफ़ियतें हो सकती हैं।
ख़ून का रगों में सर्द हो जाना,
ख़ून का रगों में दौड़ते रहना,
ख़ून का आँख से टपकना।
ख़ून का रगों में सर्द हो जाना या जम जाने को मौत से तअबीर किया गया है। इन्सान अगर ग़ैरतमन्द न हो, अपनी बक़ा के लिये भी हाथ-पैर न मार सकता हो तो इसका मतलब है इन्सान फ़ना के घाट उतर चुका है, यानी उस पर मौत तारी हो चुकी है। फिर वो चलती-फिरती एक ज़िन्दा लाश से ज़्यादा कुछ नहीं है।
दूसरी कैफ़ियत एक हैवानी सतह की कैफ़ियत है। इस कैफ़ियत में इन्सान ग़ैरतमन्द होता है। अपनी बक़ा पर जब आन पड़ती है तो हाथ-पैर मारता है, अपना दिफ़ाअ भी करता है, यानी हरकत में रहता है चाहे ये हरकत सिर्फ़ अपने लिये ही क्यों न हो। ये ज़िन्दगी की हैवानी सतह है, यानी इतना काम तो तमाम हैवान करते ही हैं।
तीसरी कैफ़ियत ये है कि इन्सान अपनी ज़िन्दगी में कोई मिशन रखता है। उस मिशन के लिये अपने-आपको न सिर्फ़ हरकत में रखता है बल्कि अपने-आपको इतना थकाता है कि ख़ून-पसीना एक कर देता है। अपने इस मिशन को कामयाब बनाने में जो रुकावटें आती हैं, रास्ते में जो मुश्किलात आती हैं उन मुश्किलात और परेशानियों का इस तरह मुक़ाबला करता है कि आँख से आँसू की जगह ख़ून टपकने लगता है।
इन्सान जो अपनी ज़िन्दगी में बड़ा मक़सद रखता है वो ज़िन्दगी की हैवानी सतह को क़बूल नहीं करता यानी ख़ून, जो कि रगों में दौड़ता फिरता है ये तो महज़ इस बात की अलामत है कि आप ज़िन्दा हैं बिलकुल उसी तरह जिस तरह दूसरे हैवान ज़िन्दा हैं। ज़िन्दगी का बड़ा मक़सद रखनेवाले लोग ज़िन्दगी की इस सतह के क़ायल नहीं होते, वो अपने मक़सद की ख़ातिर तूफ़ानों का मुक़ाबला करते हैं, मेहनत और जिद्दोजुहद करते हैं, इतनी जिद्दोजुहद कि लहू आँख से टपकने लगे।
इसी बात को एक शाइर ने इस तरह बयान किया है कि
ज़िन्दगी जंग है आसाब की और ये भी सुनो।
इश्क़ आसाब को मज़बूत बना देता है।।
अल्लामा इक़बाल ने इस सिलसिले में और भी ज़बरदस्त बात कही है कि
रगों में गर्दिशे-ख़ूँ है अगर तो क्या हासिल।
हयात सोज़े-जिगर के सिवा कुछ और नहीं।।
बा-मक़सद ज़िन्दगी ख़ून के रगों में गर्दिश करते रहने की हरगिज़ क़ायल नहीं हो सकती, बल्कि ज़िन्दगी तो इसी चीज़ का नाम है कि इन्सान अपने मक़सद के लिये हर वक़्त हरकत में रहे, अपने-आपको उस मक़सद के लिये खपाता रहे।