बस-कि दुश्वार है हर काम का आसाँ होना
आदमी को भी मुयस्सर नहीं इंसाँ होना
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मतलब
अगर किसी काम को सलीक़े से किया जाए तो उसमें वक़्त भी लगता है और मुश्किलें भी आती हैं। आदमी के बारे में अगर सिर्फ़ इतना ख़याल किया जाए कि आदम की औलाद को आदमी कहते हैं तो यक़ीनन दो टाँगें और दो हाथ रखनेवाला हर वुजूद आदमी है। लेकिन अगर इसको इससे आगे तसव्वुर किया जाए कि ये सिर्फ़ आदमी ही नहीं है बल्कि इससे बढ़कर वो एक इंसान बनने की सलाहियत भी अपने अन्दर रखता है। इंसान मुहब्बत के जज़्बात रखनेवाली एक ज़िन्दा हस्ती का नाम है, इंसान अपने ख़यालात को जज़्बात के साँचे में ढालकर दूसरों के सामने रखनेवाली एक बा-शुऊर हस्ती का नाम है। इस नज़रिये से देखें तो मालूम होगा कि यूँ तो इस दुनिया में सलीक़े से किये जानेवाला हर काम मुश्किल है मगर आदमी से इंसान बनने का सफ़र इन्तिहाई मुश्किल काम है।