जिन लोगों ने इस ईदे-क़ुर्बां पर हज़रत इबराहीम अलैहिस्लाम की क़ुर्बानियों से ताबीर ज़िन्दगी को याद करके ये अहद किया हो कि हम भी अल्लाह और उसके दीन के लिए अपना सब कुछ क़ुर्बान कर देंगे,
जिन लोगों ने अहद किया हो कि हम अल्लाह की ख़ुशी के लिए हर बुरे और ग़लत काम को छोड़ देंगे और तक़वा की ज़िन्दगी इख़्तियार करेंगे,
जिन लोगों ने अहद किया हो कि हम अल्लाह के दीन को सबसे पहले अपनी ज़िन्दगी में और फिर इस रूए-ज़मीन पर क़ायम करने के लिए अपना वक़्त, सलाहियत और दौलत सब कुछ क़ुर्बान कर देंगे,
जिन लोगों ने अहद किया हो कि हम अल्लाह को राज़ी करने के लिए अपनी नफ़सानी ख़ाहिशात, जज़्बात और एहसासात तक को क़ुर्बान कर देंगे,
जिन लोगों ने अहद किया हो कि अल्लाह की मुहब्बत के मुक़ाबले में हम तमाम मुहब्बतों को क़ुर्बान कर देंगे
*उन लोगों को ये ईदे-क़ुर्बां बहुत-बहुत मुबारक हो*
और
जिन लोगों ने जानवर की तो क़ुर्बानी की लेकिन इनमें से किसी बात का भी अहद नहीं किया तो उनसे बस इतना कहना है कि
भाइयो आख़िर इन बेज़ुबान जानवरों ने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है?
क्या तुम्हें मरकर अल्लाह के हुज़ूर हाज़िर नहीं होना है?
याद रखना, यही बेज़ुबान जानवर जिन्हें तुमने नाहक़ क़त्ल कर डाला है, अल्लाह से गुहार लगाएँगे कि इस शख़्स का मन्शा सिवाए अपनी ज़बान के ज़ायक़े और नुमूदो-नुमाइश के कुछ और नहीं था।
उस वक़्त अल्लाह को क्या मुँह दिखाओगे। ज़रा सोचो!!!
क्या उस वक़्त इन बेज़ुबान जानवरों के नाहक़ क़त्ल की सज़ा से बच पाओगे?
याद रखना अल्लाह बड़ा इंसाफ़ करने वाला है।