अफ़राद के हाथों में है अक़वाम की तक़दीर।
हर फ़र्द है मिल्लत के मुक़द्दर का सितारा।।
मेरे नौजवान साथियो! शायद तुम्हें मालूम नहीं है कि तुम्हारी क़ौम किस क़दर पस्ती का शिकार हो रही है।
इस क़ौम को अगर कोई पस्ती से निकाल सकता है तो वो तुम हो। तुम ही इस क़ौम के मुक़द्दर का सितारा हो।
मगर क्या वो नौजवान किसी क़ौम के मुक़द्दर का सितारा बन पाएँगे जो अपना क़ीमती वक़्त रातों को सोशल-मीडिया पर गुज़ारते हैं और सिर्फ़ पास होने के लिये पढ़ते हैं और किसी मालदार घराने में शादी के लिये नौकरी के जुगाड़ में रहते हैं?
नहीं! हरगिज़ नहीं!
नौजवान साथियो! क़ौमों की तक़दीर उसी वक़्त चमकती है जब उसका नौजवान किसी बड़े मक़सद के लिये जीने का अज़्म करता है। अगर ज़िन्दगी का मक़सद अपनी ज़ात से ऊपर उठकर अपना मुल्क और अपनी क़ौम हो और इन तमाम से ऊपर उठकर पूरी इन्सानियत हो तो उस क़ौम को तरक़्क़ी से कोई नहीं रोक सकता। और ज़िन्दगी का ये अज़ीम मक़सद क़ुरआन के अलावा कहीं नहीं मिलेगा।
इसलिये अपनी ज़िन्दगी की हक़ीक़त को पहचानो, अपने-आपको ग़फ़लत से निकालो और अपनी ज़िन्दगी के क़ीमती लम्हात को तामीरी (Constructive) कामों में लगाओ। याद रखो! ज़िन्दगी के ये क़ीमती लम्हात फिर कभी तुम्हें नसीब नहीं होंगे।
क़ुरआन को अपनी रातों का साथी बनाओ; दिन में ऐसे नेक लोगों की सोहबत इख़्तियार करो जो तुम्हें ज़िन्दगी की मुश्किल पगडंडियों पर ख़ूबसूरती के साथ चलने का हुनर सिखा सकें।