मुसलमान क्या हैं और क्या नहीं हैं
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मुसलमान महज़ एक मज़हबी गरोह नहीं हैं कि वो इस्लाम के साथ कुछ आस्थाओं और अक़ीदों की बुनियाद पर चिमटे रहें।
मुसलमान महज़ कोई कल्चरल ग्रुप भी नहीं हैं कि वो इस्लाम के साथ मुआशरती और तमद्दुनी हैसियत से वाबस्ता हो जाएँ।
मुसलमान महज़ कोई सियासी बाज़ीगरों का टोला भी नहीं हैं कि वो इस्लाम को लोगों पर ज़बरदस्ती थोपने के लिये हर तरह के हथकण्डे इस्तेमाल करने लगें।
मुसलमान तो दरअस्ल आइडियोलॉजी की बुनियाद पर बरपा की जानेवाली एक मुनज़्ज़म उम्मत हैं जो मुआशरे के अन्दर अम्न व इन्साफ़ क़ायम करने के लिए वुजूद में लाई गई है ताकि लोग अपने रब अल्लाह की रज़ा हासिल करके हमेशा की ज़िन्दगी में कामयाब हो जाएँ।
इस मुनज़्ज़म गरोह के बाक़ी रहने का दारोमदार इस बात पर है कि इसके अफ़राद सबसे पहले इस्लाम के निज़ामे-फ़िक्र (आइडियोलॉजी) को समझें, इसकी रूह से वाक़िफ़ हों और ज़िन्दगी के हर शोबे में इस रूह की अमली तफ़्सीर पेश करने की भरपूर कोशिश करें।