इस सादगी पे कौन न मर जाए ऐ ख़ुदा।
लड़ते हैं और हाथ में तलवार भी नहीं।।
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मतलब
अच्छी मगर दलील से भरी बातचीत में वो ताक़त होती है कि जिसके ज़रिए हाथ में तलवार लिये बग़ैर इन्सानों के अन्दर की बहुत-सी बुराइयों से लड़कर उनको हराया जा सकता है। ये एक लड़ाई होती है जिसमें सादगी ऐसी कि जिस पर हर इन्सान फ़िदा हो जाए लेकिन लड़ने के लिये हाथ में कोई हथियार नहीं होता बल्कि बातों में दलील का वज़न, बोली की मिठास और लहजे की संजीदगी होती है। इस लड़ाई से इन्सानों के दिलों को जीता जा सकता है जो सबसे बड़ी फ़तह होती है।
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